
New Delhi, 13 अक्ट . Union Minister पीयूष गोयल और ललन सिंह (राजीव रंजन सिंह) ने New Delhi में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Lok Sabha के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला. पीयूष गोयल ने राहुल गांधी को कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा ‘रेड फ्लैग’ बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता खुद राहुल गांधी के खिलाफ अपनी बात रख रहे हैं.
पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है लेकिन अपने खुद के कामों और अपने ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज करती है. उन्होंने राहुल गांधी के रवैये और संविधान के हर पहलू को कमजोर करने की कोशिश पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, “कांग्रेस के कई नेता राहुल गांधी के खिलाफ अपनी बात रख रहे हैं. शशि थरूर जी ने खुद कहा कि एसआईआर के कारण केरल में कांग्रेस चुनाव जीती है. रमेश चेन्नीथला ने खुद कहा कि एसआईआर के कारण केरल में कांग्रेस चुनाव जीती है. केरल के Chief Minister ने भी एसआईआर की तारीफ की है. अधीर रंजन चौधरी ने भी चुनाव आयोग की तारीफ की है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने अच्छे से चुनाव करवाया है. अब उनकी खुद की पार्टी बेबुनियाद और झूठे वोट चोरी के दावे कर रही है.”
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए Government ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र तरीके से देशहित और जनहित में काम करने के लिए पूरी तरह से स्वायत्तता दी है. चुनाव आयोग के अधिकारियों को Political लाभ देने का प्रयास नहीं किया गया. उन्हें ईमानदारी से काम करने दिया गया.
कांग्रेस के ट्रैक रिकॉर्ड पर पीयूष गोयल ने कहा, “राहुल गांधी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो एक चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पार्टी टिकट पर उम्मीदवार बनाया गया, एक को यूनियन कैबिनेट में लिया गया, दो चीफ इलेक्शन कमिश्नरों को गवर्नर बनाया गया और एक बार चीफ इलेक्शन कमिश्नर के यह कहने पर कि उनके नीचे काम करने वाला इलेक्शन कमिश्नर कांग्रेस के एजेंट की तरह काम कर रहा है, उसे निकालने से इनकार कर दिया गया. ऐसा पक्षपात हमने शायद ही किसी Government में देखा गया होगा.”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अक्सर चीफ इलेक्शन कमिश्नर टीएन शेषन की ईमानदारी का बड़ा गुणगान करती थी. हालांकि 1999 में उन्हें आडवाणी के सामने कांग्रेस के टिकट पर खड़ा होने का मौका दिया गया. क्या यह उन्हें रिवार्ड करने का काम नहीं था?
उन्होंने कहा, “एमएस गिल 1996 से 2001 तक चीफ इलेक्शन कमिश्नर थे. 2000 में सिटिंग चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पद्म विभूषण से नवाजा गया. क्या यह उनकी कारनामों को रिवार्ड देना नहीं था? रिटायरमेंट के 3 साल बाद वे कांग्रेस ज्वाइन करते हैं, 2004 में राज्यसभा में आते हैं, 2008 में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनाया जाता है. इससे ज्यादा आपको क्या सबूत चाहिए कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग के ऑफिस को कितने निचले स्तर पर गिरा दिया और अधिकारियों का कैसे दुरुपयोग किया.”
उन्होंने कहा, “टीकाराम मीणा केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे. एक वर्ष बाद उन्हें कांग्रेस की Rajasthan मेनिफेस्टो टीम में ले लिया गया. मई 2026 में रतन यू केलकर केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे. चुनाव के तुरंत बाद वर्तमान Chief Minister वीडी सतीशन ने उन्हें अपना चीफ सेक्रेटरी घोषित कर दिया. क्या यह Political रोटियां सेंकना नहीं है कि आप चुनाव में मदद कीजिए और हम आपको पद पर नियुक्त कर देंगे.”
उन्होंने कहा कि पहले इलेक्शन कमिश्नर कैसे चुना जाता था? Government चुनती थी. जिसे चाहा, उसे चीफ बना दिया. यह मोदी Government है, जिसने 2023 में कानूनी प्रावधान किया. इसके तहत नेता प्रतिपक्ष को सिलेक्शन कमेटी का सदस्य बनाया गया. अब पीएम के साथ नेता प्रतिपक्ष भी तय करते हैं कि कौन चीफ इलेक्शन कमिश्नर बनेगा.
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पीएम
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