
बीजिंग, 13 सितंबर . दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी President शी जिनपिंग व भारतीय Prime Minister Narendra Modi की भेंट को जानकार द्विपक्षीय संबंध बेहतर होने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं. जेएनयू में सेंटर फॉर चाइनीज़ स्टडीज़ के प्रोफसर बीआर दीपक ने सीजीटीएन हिंदी संवाददाता अनिल पांडेय के साथ खास बातचीत में दोनों नेताओं की मुलाकात का सकारात्मक मूल्यांकन किया.
बकौल दीपक शी जिनपिंग और Narendra Modi की भेंट भारत-चीन संबंधों में प्रतिस्पर्धा से नियंत्रित सहयोग की ओर एक व्यावहारिक बदलाव की संभावना पैदा करती है. साथ ही सीमा पर तनाव कम होने से दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक जोखिम घट सकते हैं. इतना ही नहीं व्यापार, निवेश, विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और आपूर्ति-श्रृंखला में सहयोग बढ़ने की अच्छी संभावना है.
सीधी विमान सेवाओं का संचालन भी हो रहा है, वहीं लोगों के बीच संपर्क और आवाजाही बढ़ने से पर्यटन, शिक्षा व व्यावसायिक संपर्क मजबूत हो सकते हैं. इससे ब्रिक्स, एससीओ के साथ-साथ विभिन्न वैश्विक संस्थाओं में बेहतर समन्वय से विकासशील देशों की आवाज प्रभावी और मजबूत ढंग से उठाई जा सकती है.
जहां तक India की बात है तो उसके लिए स्थिर संबंध रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करेंगे. जबकि चीन को एशिया में स्थिरता और आर्थिक अवसर प्राप्त होंगे. हालांकि, सीमा विवाद अभी लंबित है, व्यापार असंतुलन, आर्थिक-तकनीकी निर्भरता आदि चुनौतियां बने रहेंगे. उधर अमेरिका-जापान सहित अन्य साझेदारों के साथ संतुलन बनाए रखना India के लिए महत्वपूर्ण होगा. ये सब बातें और कदम दोनों देशों के आपसी संबंधों को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं. कुल मिलाकर एशिया की इन दो बड़ी शक्तियों के नेताओं की मुलाकात बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रही है.
बता दें कि 12 सितंबर को India की राजधानी New Delhi में Prime Minister Narendra Modi और चीनी President शी जिनपिंग की बैठक में भारत-चीन संबंधों को स्थिर और दीर्घकालिक दिशा देने पर जोर दिया गया. दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति एवं स्थिरता, सीमा विवाद के न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तथा मतभेदों को विवाद में न बदलने पर सहमति जताई. दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार मानते हुए व्यापार, बाजार पहुंच, निवेश और आपूर्ति-शृंखला सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों, पर्यटन और मानवीय संपर्क को मजबूत करने के अलावा ब्रिक्स, एससीओ और संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने की भी प्रतिबद्धता व्यक्त हुई.
कहा जा सकता है कि ब्रिक्स अब एक बड़ा मंच बनने की ओर अग्रसर है, जिससे ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत की भी अहसास होता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि ब्रिक्स में शामिल अपने मतभेदों को किनारे रखकर दूरदृष्टि से काम करेंगे.
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डीकेपी/
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