राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्ति के बाद मदन मोहन पांडे बोले- श्रद्धालुओं की सुविधा प्राथमिकता

अयोध्या, 3 सितंबर . श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य के तौर पर नियुक्त किए गए अधिवक्ता मदन मोहन पांडे ने कहा कि वह राम जन्मभूमि से जुड़े संघर्ष और कानूनी लड़ाई से लंबे समय से जुड़े रहे हैं. उनकी ओर से 1994 में इस मामले में औपचारिक तौर पर वकालतनामा दाखिल किया गया था. इसके बाद उन्होंने महंत परमहंस रामचंद्र दास और रामलला की ओर से अदालतों में पैरवी की.

मदन मोहन पांडे ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि उन्हें यह जिम्मेदारी हाल ही में मिली है. वह राम जन्मभूमि से जुड़े संघर्ष में शुरुआत से ही जुड़े रहे हैं, लेकिन मामले में उनका औपचारिक वकालतनामा वर्ष 1994 में दाखिल हुआ था. यह वकालतनामा परमहंस रामचंद्र दास की ओर से दाखिल हुआ था. इसके बाद वह रामलला के भी वकील बने और दोनों पक्षों की ओर से कानूनी पैरवी करते रहे.

पांडे ने कहा कि उन्होंने इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट से लेकर Supreme Court तक देखा और अदालतों में पैरवी किया. Supreme Court में अंतिम फैसला उनके पक्ष में आया. हाई कोर्ट में भी फैसला उनके पक्ष में रहा था, हालांकि बाद में दूसरे पक्ष की ओर से फैसले में पार्टीशन कराया गया.

ट्रस्ट में शामिल किए जाने के बाद अपनी भावना व्यक्त करते हुए मदन मोहन पांडे ने कहा कि अब उनका प्रयास होगा कि वह इस जिम्मेदारी के तहत जितनी सेवा कर सकते हैं, करें. लंबे समय तक जिस विषय से जुड़े रहे, उससे संबंधित ट्रस्ट में जिम्मेदारी मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि मेरी प्राथमिकता दर्शन के लिए अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है. ट्रस्ट के माध्यम से दर्शनार्थियों के लिए जितनी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, उन्हें बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट का सदस्य बनने के बाद मंदिर के विकास और उत्थान के लिए जितना संभव होगा, उतना काम किया जाएगा. नई जिम्मेदारी में सेवा, श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर के विकास पर विशेष ध्यान रहेगा.