राजस्थान: 2 करोड़ रुपये रिश्वत मामले में एसओजी के एएसपी मुकेश कुमार सोनी निलंबित

jaipur, 6 अक्टूबर . Rajasthan Government ने उदयपुर में 2 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के एएसपी मुकेश कुमार सोनी को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से Government को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई है.

सोनी पर उदयपुर में 272 भूखंडों से जुड़े मामले में आरोपियों को राहत देने के एवज में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है. एसीबी ने 26 सितंबर को कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को 2 करोड़ रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था. इसके अगले दिन एएसपी मुकेश सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

जांच के आधार पर गृह विभाग ने Chief Minister कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद सोनी के निलंबन का आदेश जारी किया. उनका निलंबन 27 सितंबर से प्रभावी माना गया है. मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है.

आरोप है कि सोनी ने उदयपुर के जमीन मामले में दो बिचौलियों के माध्यम से रिश्वत की रकम लेने की योजना बनाई थी. हाई-प्रोफाइल रिश्वत मामले में गिरफ्तारी के बाद से ही उनके निलंबन को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं. अब गृह विभाग के औपचारिक आदेश के साथ विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो गई है.

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें Rajasthan Police की विशेष जांच इकाई एसओजी में तैनात एएसपी रैंक के अधिकारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा है.

जांच के तहत एसीबी की टीम कथित बिचौलिए सज्जन सिंह को सोनी के आवास पर लेकर गई और मौके पर सत्यापन किया. इस कार्रवाई का नेतृत्व जांच अधिकारी महावीर सिंह शेखावत ने किया. एसीबी के अनुसार, सज्जन सिंह अक्सर सोनी के आवास पर जाता था और कथित रिश्वत के लेन-देन को लेकर वहां उससे मुलाकात करता था.

जांच में यह भी सामने आया कि 23 सितंबर को सोनी ने रानी रोड पर होने वाली बैठक का समय तीन बार बदला था. बैठक पहले सुबह 10 बजे तय थी, जिसे बाद में दोपहर 1 बजे और फिर शाम 5 बजे कर दिया गया. अंतिम समय के बावजूद सोनी करीब डेढ़ घंटे की देरी से शाम करीब 6.30 बजे वहां पहुंचे.

सज्जन सिंह शिकायतकर्ता निरंजन मोगरा के साथ महाकालेश्वर मंदिर के पास पहुंचा था. इसके कुछ देर बाद सोनी अपनी कार से वहां पहुंचे और दोनों को अपनी कार के पास बुलाया. तीनों के बीच करीब चार मिनट तक बातचीत हुई. एसीबी के मुताबिक, कथित रिश्वत की रकम को लेकर मौखिक बातचीत करने के बजाय सोनी ने अपने मोबाइल फोन पर टाइप करके जानकारी दी.

एसीबी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद तीन दिनों तक डिजिटल रिकॉर्डिंग के जरिए 2 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत की मांग का सत्यापन किया गया. एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई. कथित बिचौलिए ने शिकायतकर्ता और सोनी के बीच दो व्हाट्सऐप कॉल भी कराई थीं. एसीबी ने बातचीत और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़ी डिजिटल रिकॉर्डिंग भी हासिल की है.

जांच के दौरान एसीबी ने सोनी के कार्यालय से 41 भूखंडों से संबंधित फाइलें बरामद कीं. ये भूखंड नगर निगम से जुड़े बताए गए हैं. कई दस्तावेजों पर यूडीए (अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) की मुहर और हस्ताक्षर पाए गए हैं. एसीबी अब यह जांच कर रही है कि इन दस्तावेजों पर लगी मुहर और हस्ताक्षर वास्तविक हैं या फर्जी.

जांचकर्ताओं को ऐसी फाइलें भी मिलीं, जिनमें भूखंडों के नंबर बदले हुए दिखाई दिए और जो मूल फाइलों के बाद तैयार की गई थीं. इससे कथित तौर पर फाइलों में छेड़छाड़ और भूखंडों के नंबर बदलने के पहलू भी जांच के दायरे में आ गए हैं.

यह मामला उदयपुर के 272 भूखंडों से जुड़े विवाद से संबंधित है. आरोप है कि खाली और निरस्त भूखंडों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार कर स्वामित्व रिकॉर्ड में बदलाव कराया गया और बाद में इन भूखंडों को कथित तौर पर बेच दिया गया. इस संबंध में 2022 में सूरजपोल थाने में First Information Report दर्ज की गई थी.

जांच के बाद नगर निगम ने 48 लीज डीड रद्द कर दी थीं. इसी मामले में एसओजी ने पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कंकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को भी गिरफ्तार किया था.

जांच के दौरान मोगरा के घर से करीब दो किलोग्राम सोने के आभूषण और 11 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई थी. आरोप है कि मामले को बंद करने के लिए अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने और जब्त सामान वापस करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी. मामले में आगे की जांच जारी है.

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डीएससी