
jaipur, 8 अक्टूबर . Rajasthan के पंचायत चुनाव के लिए आधिकारिक तौर पर लड़ाई शुरू हो गई है. राज्य चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार, 13 अक्टूबर तक पहले चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सीटों के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार दोपहर 3 बजे तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं.
नामांकन पत्रों की जांच 14 अक्टूबर को होगी. जो उम्मीदवार अपना नॉमिनेशन वापस लेना चाहते हैं, वे 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तक नामांकन वापस कर सकते हैं. नाम वापस लेने की समय-सीमा खत्म होने के बाद, उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न दिए जाएंगे.
पहले चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों के लिए वोटिंग 22 अक्टूबर को होगी. जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, गांवों में Political गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है. बड़ी पार्टियों के लिए चुनौती सिर्फ उम्मीदवार चुनने तक ही सीमित नहीं होगी. उन्हें स्थानीय प्रतिद्वंद्विता, गुटीय समीकरणों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने जैसी चुनौतियों का भी सामना करना होगा.
राज्य या राष्ट्रीय चुनावों के विपरीत, पंचायत चुनाव स्थानीय मुद्दों से काफी हद तक प्रभावित होते हैं. सड़कें, पानी, बिजली, विकास कार्य, रोजगार और कृषि महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे लेकिन व्यक्तिगत संबंध, सामुदायिक समीकरण और गांवों में लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता भी अहम भूमिका निभाएगी.
औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही, गांवों में Political गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है. भाजपा और कांग्रेस अपनी संगठनात्मक ताकत को परखने की तैयारी कर रही हैं, जबकि क्षेत्रीय और छोटी पार्टियां तथा निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले के लिए कमर कस रहे हैं.
कांग्रेस और भाजपा के लिए, पंचायत चुनाव स्थानीय निकायों की लड़ाई से कहीं बढ़कर हैं. ये चुनाव उनके जमीनी संगठन और स्थानीय स्तर पर परस्पर विरोधी हितों को संभालने की क्षमता की परीक्षा भी हैं. छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए, ये चुनाव पारंपरिक भाजपा-कांग्रेस मुकाबले से हटकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का एक मौका हैं.
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एसडी/पीएम
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