राजस्थान: उदयपुर में पांच लोगों पर हमला करने वाला पैंथर पकड़ा गया

jaipur, 29 अगस्त . उदयपुर शहर के निकट उमरड़ा क्षेत्र के खेड़ा गांव में लगातार दो दिनों तक पांच लोगों पर हमला कर दहशत फैलाने वाले पैंथर को आखिरकार वन विभाग ने Saturday सुबह पकड़ लिया. पिंजरे में फंसने के बाद उसे बेहोश कर सज्जनगढ़ जैविक उद्यान भेज दिया गया.

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पैंथर Friday तड़के फिर उसी क्षेत्र में लौट आया था. उसके मूवमेंट कैमरा ट्रैप में कैद हुए थे, लेकिन पिंजरे के पास आने के बावजूद वह उसमें नहीं घुसा. पशु हमले वाली जगह के आसपास करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में ही घूम रहा था.

ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने और वन विभाग द्वारा 24 घंटे निगरानी रखने की वजह से इस दौरान कोई नया हमला नहीं हुआ. पैंथर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभाग ने एक अतिरिक्त पिंजरा, कई कैमरा ट्रैप और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की थी.

उत्तरी वन मंडल के उप वन संरक्षक (डीसीएफ) डीके तिवारी के नेतृत्व में करीब 40 वनकर्मी मौके पर डटे रहे. अधिकारियों ने हमले वाले क्षेत्र का निरीक्षण कर पैंथर के संभावित रास्तों की पहचान की. उसके पदचिह्नों का पता लगाने के लिए रास्तों पर रेत बिछाई गई, जिससे पुष्टि हुई कि वह सीमित क्षेत्र में ही घूम रहा था.

Saturday को पैंथर पिंजरे में फंस गया, जिसके बाद उसे ट्रैंक्विलाइजर देकर बेहोश किया गया और सज्जनगढ़ जैविक उद्यान पहुंचाया गया.

पिछले दो दिनों में पैंथर के हमले में 45 वर्षीय लोगरलाल मीणा की मौत हो गई थी, वहीं 60 वर्षीय जग्गा मीणा, 20 वर्षीय हितेश, 40 वर्षीय कालू और 45 वर्षीय लोगरी बाई घायल हुए थे. अधिकारियों के अनुसार सभी घायल फिलहाल खतरे से बाहर हैं.

पहला हमला Tuesday देर शाम हुआ था, जिसमें एक युवक घायल हो गया था. इसके बाद ग्रामीणों ने सामान्य गतिविधियां शुरू कर दी थीं, लेकिन Wednesday सुबह करीब 6 बजे पैंथर ने फिर हमला कर तीन लोगों को घायल कर दिया, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई. उसी दिन दोपहर करीब 1 बजे एक महिला पर भी हमला हुआ, जिसके बाद हालात और गंभीर हो गए.

लगातार हमलों के बाद खेड़ा गांव के लोगों ने गांव खाली कर दिया था और सरकारी भवनों तथा रिश्तेदारों के घरों में शरण ली थी. हालांकि, ग्रामीण अभी पूरी तरह वापस नहीं लौटे हैं, लेकिन पैंथर के पकड़े जाने से इलाके में राहत और सुरक्षा की भावना बढ़ी है.

एएमटी/डीकेपी