
New Delhi, 9 अक्टूबर . Union Minister जी. किशन रेड्डी ने कांग्रेस सांसद और Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के व्यवहार में एक विचित्र, खतरनाक प्रवृत्ति दिखाई दे रही है. राहुल गांधी की यह आदत बन गई है कि जब संवैधानिक संस्थाएं और सरकारी व्यवस्थाएं उनके पक्ष में काम करती हैं, तो वे उन्हें लोकतांत्रिक बताकर उनकी प्रशंसा करते हैं.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में, चुनाव आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी), न्यायपालिका और संसद को बदनाम करके, इन संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करना कांग्रेस पार्टी के दिवालिया होने का प्रतिबिंब है. Political लाभ के लिए, कांग्रेस पार्टी झूठे आरोप लगा रही है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश रच रही है. केंद्रीय चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी के मौजूदा आरोप भी इसी Political साजिश का हिस्सा हैं.
उन्होंने कहा कि हाल ही में, कांग्रेस पार्टी ने बार-बार झूठे आरोप फैलाए हैं, Political आंदोलन छेड़े हैं, निर्दोष युवाओं को उकसाया है, लोगों में डर पैदा किया है और इन कानूनी संस्थाओं के कामकाज पर संदेह पैदा करने की कोशिश की है. राहुल गांधी की यह हरकत किसी Political साजिश की तरह लग रही है. लोग कांग्रेस पार्टी की Political साजिशों को समझ रहे हैं, जो संवैधानिक पदाधिकारियों पर विरोध प्रदर्शनों, अपमान, धमकियों और अभद्र भाषा के इस्तेमाल के जरिए दबाव बनाने की एक योजना के तहत चल रही है.
Union Minister ने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा, “प्रिय राहुल गांधी… यदि देश की जनता आपको बार-बार संवैधानिक रूप से कई चुनावों में नकार रही है क्योंकि उन्हें आप पर विश्वास नहीं है, तो यह चुनाव आयोग की गलती नहीं है. चुनाव आयोग का काम आपको Prime Minister बनाना या कांग्रेस, भाजपा या किसी अन्य पार्टी को जिताना नहीं है. चुनाव आयोग का काम केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है. जनता का विश्वास जीतना, जनता का समर्थन हासिल करना और वोट प्राप्त करना आपका काम है. लेकिन आप इसमें पूरी तरह विफल रहे हैं.” इसी तरह, जब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले आपके पक्ष में नहीं होते हैं तो उनकी आलोचना करना और सर्वोच्च न्यायालय की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना आपकी आदत बन गई है. सर्वोच्च न्यायालय का काम आपको अनुकूल फैसले देना नहीं है. संविधान और कानून के अनुसार निष्पक्ष रूप से न्याय प्रदान करना न्यायालयों का कर्तव्य है. एक जिम्मेदार प्रमुख विपक्षी नेता के पद को गुप्त Political उद्देश्यों के लिए अपमानित किया जा रहा है. यह अपमानजनक है.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट संसद में पेश होने पर भी ठीक वैसा ही बर्ताव किया. उन्होंने देश की सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट में उनके Political आरोपों के पक्ष में कोई बात नहीं है. रिपोर्ट को व्यंग्यपूर्वक ‘चौकीदार महालेखा परीक्षक’ की रिपोर्ट करार दिया गया.
रेड्डी ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के अलावा, आपने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को भी Political आलोचना का निशाना बनाया है. आईआईटी, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों पर भी आरोप लगाए गए. उन्हें भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का केंद्र बताकर, संबंधित संस्थानों के शिक्षकों और अधिकारियों की आलोचना करके, झूठे आरोप लगाकर और प्रतिदिन उनके कार्यक्रमों को बदनाम करके, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त संस्थानों के महत्व और भारतीय शिक्षण संस्थानों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया. केंद्रीय सशस्त्र बलों, भारतीय सेना को भी बदनाम किया गया है.
Union Minister ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने Political विचारों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों, अंतरराष्ट्रीय मंचों और यहां तक कि विदेशी मीडिया का भी इस्तेमाल करने में कोई संकोच नहीं किया है, जिससे India की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है. विदेशों में India की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रणाली के पतन का आरोप लगाकर और देश की अर्थव्यवस्था के पतन की आलोचना करके उन्होंने देश की गरिमा को ठेस पहुंचाने और देश के विकास और निवेश में बाधा डालने का प्रयास किया है. India को अपमानित करना एक Political रणनीति बन गई है, जिसे Political अक्षमता को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाया गया है.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी में यह प्रवृत्ति नहीं दिखती. 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए Government द्वारा लाए गए अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से फाड़कर तत्कालीन Prime Minister मनमोहन सिंह का अपमान करना, पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व Prime Minister पीवी नरसिम्हा राव का अपमान करना और अंत में उनके निधन पर उनके पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय में न ले जाना, ये सभी घटनाएं देश की जनता भूली नहीं हैं. यह उनके अपने ही पार्टी नेताओं के प्रति उनकी लापरवाही का प्रमाण है.
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एमएस/
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