
New Delhi, 24 अगस्त . महान क्रांतिकारी और अमर बलिदानी शिवराम हरि राजगुरु की जयंती पर पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है. Lok Sabha स्पीकर ओम बिरला और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह समेत कई दिग्गज नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है. शाह ने कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान देश के युवाओं को सदैव राष्ट्र प्रथम के लिए प्रेरित करता रहेगा.
Lok Sabha स्पीकर ओम बिरला ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देने वाले महान क्रांतिकारी और अमर शहीद शिवराम हरि राजगुरु की जयंती पर कोटि-कोटि नमन. अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय और दमन के विरुद्ध राजगुरु ने अदम्य साहस, निर्भीकता और राष्ट्रभक्ति के साथ संघर्ष किया. भगत सिंह और सुखदेव जैसे महान क्रांतिकारियों के साथ उनका संघर्ष India के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास का वह गौरवशाली अध्याय है, जिसने देश के युवाओं में स्वतंत्रता की चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की.”
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शहीद राजगुरु की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “मातृभूमि की स्वाधीनता को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बनाकर राजगुरु ने भगत सिंह और सुखदेव के साथ मिलकर क्रांति की ऐसी ज्वाला प्रज्वलित की, जिसने पूरे स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा व ऊर्जा दी. अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के आगे उन्होंने कभी सिर नहीं झुकाया और हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगा लिया.”
अमित शाह ने कहा कि मात्र 22 वर्ष की आयु में दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान देश के युवाओं को सदैव राष्ट्र प्रथम के लिए प्रेरित करता रहेगा.
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने पोस्ट किया, “India की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अमर शहीद शिवराम हरि राजगुरु की जयंती पर उन्हें कोटिश: नमन करता हूं. मां भारती के वीर सपूत राजगुरु ने अमर शहीद भगत सिंह और सुखदेव के साथ अन्याय और औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध अदम्य साहस व निर्भीकता से संघर्ष किया. मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनका अटूट समर्पण सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा.”
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा, “अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक अमर शहीद राजगुरु की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन. मातृभूमि की स्वतंत्रता को सर्वोच्च ध्येय मानकर राजगुरु ने युवा अवस्था में ही क्रांतिकारी आंदोलन का मार्ग चुना. उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मात्र 22 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते अपना सर्वस्व राष्ट्र के चरणों में अर्पित कर दिया. राजगुरु जी का अमर बलिदान राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च त्याग की प्रेरणा देता रहेगा.”
–
डीसीएच/
Skip to content