
रांची, 1 अक्टूबर . भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची के अशोक नगर में एक पत्रकार और उनके परिवार के साथ कथित उत्पीड़न, धमकी और रास्ता अवरुद्ध करने के मामले में Chief Minister हेमंत सोरेन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है. मरांडी ने Chief Minister को पत्र भेजकर Police उपमहानिरीक्षक आलोक प्रियदर्शी पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है.
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कहा कि अशोक नगर रोड नंबर-1 निवासी पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम और उनके परिवार ने Police उपमहानिरीक्षक के खिलाफ शिकायत की है. शिकायत अरगोड़ा थाना प्रभारी को दी गई है और Chief Minister को भी इससे अवगत कराया गया है. पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता परिवार करीब पांच दशकों से अशोक नगर स्थित अपनी पैतृक जमीन पर रह रहा है. परिवार का दावा है कि भवन के स्वीकृत नक्शे और अन्य दस्तावेजों में अशोक नगर सोसाइटी की ओर से करीब 40 फीट चौड़ा रास्ता दर्शाया गया है.
परिवार के अनुसार, इस रास्ते का लंबे समय से आवागमन के लिए इस्तेमाल होता रहा है. मरांडी ने कहा कि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हाल के दिनों में इस रास्ते पर अवरोध पैदा किया गया, जिससे परिवार और आसपास के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ. शिकायत के मुताबिक, 28 सितंबर की शाम करीब छह बजे आलोक प्रियदर्शी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ वहां पहुंचे और परिवार के मुख्य द्वार के सामने वाहन खड़ा कर रास्ता पूरी तरह अवरुध कर दिया.
पत्र में परिवार की ओर से झूठे मुकदमे में फंसाने, जेल भेजने और जान से मारने की धमकी देने के भी आरोप लगाए गए हैं. हथियार दिखाकर धमकाने और धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है. मरांडी ने Chief Minister से मामले की जांच किसी स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी या उपयुक्त जांच एजेंसी से कराने की मांग की है. उन्होंने शिकायतकर्ता परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी तरह के दबाव या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने का भी आग्रह किया है.
उन्होंने संबंधित जमीन, स्वामित्व, भवन के स्वीकृत नक्शे और रास्ते से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है. साथ ही कथित धमकी, रास्ता अवरुद्ध करने और धार्मिक टिप्पणी के आरोपों की साक्ष्यों के आधार पर जांच तथा Police पदाधिकारी के सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी जांच कराने का आग्रह किया है.
मरांडी ने कहा कि किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भी फैसला निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है.
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एसएनसी/डीकेपी
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