यूसीसी में आस्था पर कोई प्रहार नहीं, यह व्यवस्था में सुधार की कोशिश है: मुख्तार अब्बास नकवी

New Delhi, 14 सितंबर . भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी पर दिए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यूसीसी में आस्था पर कोई प्रहार नहीं, यह व्यवस्था में सुधार की कोशिश है.

New Delhi में से बातचीत में नकवी ने कहा कि अमित शाह ने संवैधानिक प्रतिबद्धता को दोहराया है. संविधान के अनुच्छेद 44 में संविधान निर्माताओं ने दिशा-निर्देश दिया है कि Government की जिम्मेदारी है कि वह समान नागरिक संहिता की दिशा में आगे बढ़े. Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में देश को इस दिशा में तैयार किया गया है और एनडीए की राज्य Governmentें भी यूसीसी को लेकर आगे बढ़ रही हैं. समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था में सुधार करना है. यूसीसी को लेकर सांप्रदायिकता का भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. इसमें आस्था पर किसी भी तरह का वार या प्रहार नहीं है, लेकिन हां, व्यवस्था में सुधार जरूर है.

ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर राहुल गांधी के बयान पर भी मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और चुनौतियों के बीच ब्रिक्स सम्मेलन से जिस तरह के समाधान सामने आए हैं, वह India और दुनिया के लिए गर्व की बात है. कुछ लोगों की निराशा समय-समय पर सामने आती रहती है.

उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता का जिक्र करते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया और कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने भी नाराज लोगों को लेकर टिप्पणी की है कि नाराज फूफा कभी खुश नहीं होते.

एशिया कप की ट्रॉफी भारतीय महिला क्रिकेट टीम द्वारा Pakistan क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी से लेने से इनकार करने के सवाल पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ट्रॉफी चोरी करने और सीनाजोरी करने वालों से कौन ट्रॉफी लेगा. खिलाड़ियों को मैदान के अंदर खेलना चाहिए और मैदान के बाहर से बाउंसर मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. ऐसी परिस्थितियों में अपमान का घूंट पीना पड़ता है.

वंदे मातरम के मुद्दे पर नकवी ने कहा कि दशकों तक इसे लेकर असहिष्णुता का दौर रहा और लोगों के बीच भ्रम एवं भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई. उन्होंने कहा कि आज अलग-अलग जगहों पर वंदे मातरम के साथ राष्ट्रवाद का संदेश गूंज रहा है, जो अच्छी बात है.

अवैध मदरसों के मुद्दे पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जहां मदरसे नियमों के दायरे से बाहर संचालित हो रहे हैं, वहां वैध स्कूल और कॉलेज खोले जाने चाहिए. कई मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा नहीं होती और वहां विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं देखने को मिलती हैं. बच्चों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिससे वे मुख्यधारा से जुड़ सकें और उनके भविष्य के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध हों.

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