यूसीसी का विरोध अनावश्यक, सभी राज्यों को करनी चाहिए पहल: वीएचपी

नई दिल्‍ली, 14 सितंबर . विश्‍व हिंदू परिषद के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता विनोद बंसल ने 2029 तक भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी के प्रस्तावित क्रियान्वयन का स्वागत किया. उन्‍होंने कहा कि संविधान के ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों’ में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना राज्य की जिम्मेदारी बताया गया है. उन्होंने ब्रिक्‍स समिट में विदेशी मेहमानों को दिए गए सात्विक फूड पर अपनी प्रतिक्रिया ज‍ाहिर की.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इस घोषणा पर कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए 2029 तक 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करेगा, इस पर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान कहा, “संविधान में ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों’ में यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र है, जिसमें कहा गया है कि नागरिकों के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना राज्य की जिम्मेदारी होगी. इसका मतलब है कि देश के नागरिकों के साथ लिंग, आयु वर्ग या किसी अन्य आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. इसके लिए हम उत्तराखंड Government की तारीफ करते हैं, जिसने न सिर्फ बिल पास किया बल्कि उसे लागू भी किया.”

यह Government अगले चुनावों से पहले इस काम को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसके लिए हम Government, गृह मंत्री और Prime Minister की तारीफ करते हैं. जिन राज्यों में भाजपा की Government नहीं है, उन्हें भी इस मुद्दे पर पहल करनी चाहिए, क्योंकि वहां के नागरिक भी परेशानियां झेल रहे हैं. उन्‍होंने गैर-भाजपा-एनडीए शासित राज्‍यों से यूसीसी लागू करने की पहल की अपील की है. उन्‍होंने कहा कि गैर भाजपा शासित राज्‍यों की जनता भी त्रस्‍त है. वहां के बच्‍चों और महिलाओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है. यूसीसी का अनावश्‍यक विरोध करना ठीक नहीं है, इसे तत्‍काल लागू करना चाहिए.

ब्रिक्‍स समिट पर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा,” ब्रिक्‍स समिट में कई बातें सामने आईं और ऐसी कई चीजें देखने को मिलीं जो बहुत संतोषजनक हैं और India के लिए गर्व की बात हैं. एक तरफ India का प्रभाव, India की विश्वसनीयता और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ तथा वैश्विक कल्याण के बारे में India की सोच पूरी दुनिया को पता चली. इस Government ने सभी को सात्विक भोजन परोसकर एक और कदम आगे बढ़ाया है, जिससे यह संदेश गया है कि सात्विक भोजन भी पौष्टिक और स्वादिष्ट हो सकता है. इसने एक अच्छा संदेश दिया है.

एएसएच/