
Mumbai , 14 सितंबर . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी को लेकर दिए गए बयान पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने Monday को तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि Government एकरूपता और समानता के लिए यूसीसी नहीं ला रही, बल्कि यह मुसलमानों के अधिकार छीनने की कोशिश है और पूरी तरह असंवैधानिक है.
सीबीआई की तरफ से दिशा सालियान मामले में First Information Report दर्ज करने पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “यह एक पिता की लड़ाई थी, जो वह पिछले छह साल से लड़ रहे हैं, यह साबित करने के लिए कि उनकी बेटी की हत्या हुई थी और यह आत्महत्या नहीं थी. अब सीबीआई मामले की जांच करेगी. जो भी दोषी होगा, उसे सीबीआई गिरफ्तार करेगी और अदालत कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मामले पर फैसला करेगी.”
उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार सब काम हो रहा है, तो अगर कोर्ट का मामला है, सीबीआई जांच कर रही है, सब जुड़ा है, तो उसके मेरिट पर इस वक्त जाना मेरे लिए भी उचित नहीं है और मीडिया को भी मीडिया ट्रायल नहीं करना चाहिए. उचित तथ्य कोर्ट के सामने आने दीजिए, सबूत भी कोर्ट के सामने लाए जाएं, उसके बाद जो कोर्ट फैसला करेगी, वो सबको मंजूर होगा.
वारिस पठान ने कहा कि उनके पिता का कहना था कि उनकी बेटी की मौत सुसाइड से नहीं हुई है. अगर First Information Report दर्ज हुई है तो गिरफ्तार करना या न करना सीबीआई के हाथ में है. इसका Politicalरण मत करिए, इसे Political रंग देने की जरूरत नहीं है. पिता ने जो लड़ाई लड़ी, वो कोर्ट के पास गए और कोर्ट के निर्देश के हिसाब से सब हो रहा है.
वहीं, पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष की तरफ से मदरसा शिक्षकों को लेकर दिए गए बयान पर एआईएमआईएम प्रवक्ता ने कहा कि पहले मदरसों का इतिहास जान लीजिए. पता करिए कि मदरसों में किसने पढ़ाई की और उन्होंने देश के लिए क्या किया है. पहले जांच कीजिए और वो जानकारी इकट्ठा कीजिए.
डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि की शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि देखते हैं इस मुलाकात से क्या निकलता है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी पर दिए गए बयान को लेकर वारिस पठान ने कहा कि वे समानता या एकरूपता के लिए यूसीसी लागू नहीं कर रहे हैं; यह मुसलमानों के अधिकार छीनने की कोशिश है. ये लोग असंवैधानिक तरीके से काम कर रहे हैं. यह यूसीसी समानता के लिए नहीं लाया जा रहा, बल्कि मुसलमानों के अधिकार छीनने की कोशिश है. यह पूरी तरह असंवैधानिक है.
उन्होंने कहा कि यूसीसी लाना अनुच्छेद 25 जो धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, अनुच्छेद 14 जो समानता के अधिकार की बात करता है, उसका उल्लंघन है. यह अनुच्छेद 26 और अनुच्छेद 29 का भी उल्लंघन है. विविधता हमारे देश की आत्मा है, प्लूरलिज्म हमारे संविधान की आत्मा है. आप अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग संस्कृति को फॉलो करते हैं, और आपने ट्राइबल्स को इससे बाहर कर दिया तो समानता और एकरूपता कहां रही. बीजेपी ने 21वें लॉ कमीशन को सेटअप किया था, उसकी रिपोर्ट देखेंगे तो उसमें भी लॉ कमीशन ने कहा है कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही इसकी कोई जरूरत है.
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डीएससी
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