
New Delhi, 7 नवंबर . यूरोप के आसमान में उड़ान भरने वाले यात्रियों को इन दिनों एक ही बात की चिंता सता रही है, कहीं उनकी फ्लाइट को भी तो धमकी नहीं मिली? पिछले कुछ दिनों में यूरोप के अलग-अलग देशों में यात्री विमानों को निशाना बनाकर दी गई बम धमकियों ने हवाई सफर को दहशत में बदल दिया है. दर्जनों उड़ानें या तो देरी से चलीं या उन्हें बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा, और इस लगातार मिल रही धमकियों के सिलसिले ने विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
धमकियों की वजह से कुछ विमानों को अपना रास्ता बदलना पड़ा, तो कई को दूसरे हवाई अड्डों पर उतारा गया, और कुछ की सुरक्षा जांच के लिए लड़ाकू विमानों को तैनात करना पड़ा. अब इन धमकियों का दायरा हवाई अड्डों से आगे बढ़कर मीडिया संस्थानों तक पहुंच गया है.
6 नवंबर को 18 और उड़ानें बम धमकियों से प्रभावित हुईं. ये उड़ानें बुल्गारिया, चेक गणराज्य, फ्रांस, इटली, हंगरी, साइप्रस, रोमानिया, ब्रिटेन और पुर्तगाल से जुड़ी थीं. रॉयटर्स के अनुसार, इससे पहले Tuesday और Thursday को भी कम से कम 35 उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा था या उनकी सुरक्षा जांच करानी पड़ी थी.
ताजा घटनाक्रम में प्राग आने-जाने वाली नौ उड़ानें प्रभावित हुईं, जबकि फ्रांस के हवाई क्षेत्र में उड़ रहे चार विमानों को धमकियां मिलीं. सोफिया की ओर जा रहे दो विमानों को भी अलर्ट का सामना करना पड़ा. पुर्तगाल के लिस्बन से रोम जा रही एक उड़ान को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली. हालांकि, सभी प्रभावित विमान सुरक्षित उतरे और जांच में किसी में भी विस्फोटक नहीं मिला.
धमकियों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हंगरी को अपने हवाई क्षेत्र में तीन बार लड़ाकू विमान भेजने पड़े. हंगरी के रक्षा मंत्री रोमुलुस रूसिन-सेंडी ने बताया कि ब्रसेल्स से सोफिया और प्राग से बुखारेस्ट तथा साइप्रस जा रहे यात्री विमानों को सैन्य विमानों ने एस्कॉर्ट किया. हंगरी और रोमानिया की सीमा के पास नाटो ने हवाई गश्त भी की.
इससे एक दिन पहले यानी 5 नवंबर को यूरोप के करीब 20 विमानों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली थीं. इटली, फ्रांस और बुल्गारिया ने अपने लड़ाकू विमान हवा में उतारे थे. आयरलैंड के डबलिन से रोम जा रही एर लिंगस की एक उड़ान को फ्रांस के एवरू सैन्य हवाई अड्डे पर उतारा गया. बुल्गारिया ने मैड्रिड, कोपेनहेगन और लंदन से सोफिया जा रहे तीन रायनएयर विमानों को सुरक्षा एस्कॉर्ट प्रदान किया. जांच में किसी भी विमान में विस्फोटक नहीं मिला.
स्पेन के मैड्रिड-बाराखास हवाई अड्डे पर भी ईमेल के जरिए मिली धमकियों के कारण छह उड़ानें प्रभावित हुईं. इनमें चार इबेरिया और दो एयर यूरोपा की उड़ानें शामिल थीं. ब्रिटेन के हीथ्रो और बर्मिंघम हवाई अड्डों को भी धमकियां मिलीं, लेकिन Police जांच में कोई सुरक्षा खतरा नहीं पाया गया.
2 नवंबर को भी कुछ ऐसा ही सुनने को मिला,लंदन के ल्यूटन हवाई अड्डे से सोफिया जा रही विज एयर की उड़ान को बम की धमकी के बाद बुडापेस्ट की ओर मोड़ दिया गया था. हंगरी के एक ग्रिपेन लड़ाकू विमान ने विमान को एस्कॉर्ट किया था. 3 नवंबर को भी यूरोप में सात विमानों की तलाशी ली गई या उनका रास्ता बदला गया.
इस घटनाक्रम ने 6 नवंबर को नया मोड़ ले लिया, जब आयरलैंड के सरकारी प्रसारक आरटीई और बुल्गारिया के नोवा टीवी को ईमेल के जरिए बम धमकियां मिलीं. आरटीई के डबलिन स्थित मुख्यालय को खाली कराना पड़ा और उसका प्रसारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ. ब्रिटेन के स्काई न्यूज ने भी सुरक्षा संबंधी धमकी मिलने की पुष्टि की.
रॉयटर्स के मुताबिक, इन मीडिया संस्थानों को भेजे गए संदेशों में कथित तौर पर मिखाइल एंड्रोपोव नाम का इस्तेमाल किया गया था. संदेशों का शीर्षक ‘मैसेज टू द वेस्ट’ था और उनमें यूरोप में परिवहन के साधनों को निशाना बनाकर आगे हमले करने की चेतावनी दी गई थी. हालांकि, जांच एजेंसियां यह पुष्टि नहीं कर सकी हैं कि मीडिया संस्थानों और विमानों को मिली धमकियां एक ही स्रोत से भेजी गई थीं.
इटली के रोम और सोफिया के हवाई अड्डों से जुड़ी विमानन सेवाओं को भेजे गए कुछ धमकी भरे ईमेल में ‘फाइटर्स ऑफ द मेल स्टेट’ नाम का इस्तेमाल किया गया था. यह रूस से जुड़ा एक दक्षिणपंथी, अति-राष्ट्रवादी और महिला विरोधी आंदोलन रहा है, जिसकी स्थापना 2016 में व्लादिस्लाव पॉज्दन्याकोव ने की थी. हालांकि, इस संगठन की मौजूदा घटनाओं में भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है. पॉज्दन्याकोव ने भी इससे किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया है.
यूरोप में इन घटनाओं को लेकर रूस की संभावित भूमिका पर भी चर्चा हो रही है. कुछ यूरोपीय अधिकारियों को संदेह है कि यूक्रेन के समर्थन में खड़े देशों को निशाना बनाकर व्यापक स्तर पर हाइब्रिड गतिविधियां चलाई जा सकती हैं.
स्पेनिश विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने घटनाओं के एक जैसे तौर-तरीकों पर चिंता जताते हुए इन्हें संभावित हाइब्रिड आक्रामकता और मनोवैज्ञानिक युद्ध का प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि इतने सारे देशों में एक ही तरह की घटनाओं का होना महज संयोग नहीं हो सकता.
इन घटनाओं का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब तक किसी विमान में विस्फोटक नहीं मिला है और किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है. इसके बावजूद हर धमकी पर सुरक्षा एजेंसियों को पूरी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है.
6 नवंबर को यूरोप में निर्धारित कुल 26,709 उड़ानों में से प्रभावित उड़ानों की संख्या लगभग 0.0674 प्रतिशत थी. यानी संख्या के लिहाज से ये उड़ानें कुल हवाई यातायात का बहुत छोटा हिस्सा थीं, लेकिन लगातार मिल रही धमकियों ने विमानन कंपनियों, सुरक्षा एजेंसियों और यात्रियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है.
यूरोपीय जांच एजेंसियां अब इन ईमेल और धमकी भरे संदेशों के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं. सवाल यह है कि क्या इन घटनाओं के पीछे कुछ अलग-अलग शरारती तत्व हैं या फिर नागरिक परिवहन और संचार व्यवस्था को बाधित करने की कोई व्यापक मुहिम चल रही है.
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केआर/
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