
Lucknow, 28 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश में मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण रक्त उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने रक्त केंद्रों के विरुद्ध विशेष जांच अभियान शुरू किया है. एफएसडीए आयुक्त के निर्देश पर जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए रक्त की जांच, सुरक्षित भंडारण और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करने के उद्देश्य से प्रदेश के 10 जनपदों में चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी द्वारा संचालित 40 रक्त केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया.
जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर सात रक्त केंद्रों में रक्त एवं रक्त घटकों से संबंधित गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है, जबकि अन्य केंद्रों में मिली कमियों के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं. औषधि निरीक्षकों की अंतरजनपदीय टीम द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत रक्त की गुणवत्ता, अनिवार्य संक्रमण जांच, सुरक्षित भंडारण, तापमान नियंत्रण, स्टॉक प्रबंधन, मूल्य निर्धारण और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता समेत विभिन्न मानकों की जांच की जा रही है, जो नियमित रूप से जारी रहेगी.
विशेष अभियान के तहत Lucknow में 13 रक्त केंद्रों की जांच की गई. इसके अलावा आगरा में पांच, मुजफ्फरनगर में चार, बिजनौर में चार, Kanpur में पांच, अलीगढ़ में तीन, गाजियाबाद और वाराणसी में दो-दो तथा गोरखपुर और प्रयागराज में एक-एक रक्त केंद्र का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान रक्त केंद्रों में अनिवार्य परीक्षणों, रक्तदाताओं एवं रक्त प्राप्तकर्ताओं के अभिलेखों, तापमान नियंत्रण व्यवस्था, स्टॉक रजिस्टर, लाइसेंस की वैधता और आवश्यक चिकित्सा एवं तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता की जांच की गई.
जांच में कुछ रक्त केंद्रों पर अनिवार्य एलिसा और अन्य संक्रमण संबंधी परीक्षणों में लापरवाही, रक्त प्राप्तकर्ताओं का पूरा विवरण दर्ज नहीं करने तथा तापमान रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर का समुचित रखरखाव नहीं करने जैसी अनियमितताएं सामने आईं. कुछ केंद्रों पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी भी अनुपस्थित मिले. रक्त की सुरक्षा के लिए एचआइवी, एचबीएसएजी, एचसीवी, वीडीआरएल और मलेरिया जैसे संक्रमणों की निर्धारित जांच के साथ रक्त एवं उसके घटकों का उचित भंडारण और निर्धारित तापमान बनाए रखना जरूरी है. इन मानकों की अनदेखी से रक्त की गुणवत्ता प्रभावित होने और मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा होने की आशंका रहती है.
कुछ गंभीर अनियमितताओं के आधार पर सात रक्त केंद्रों में रक्त एवं रक्त घटकों से संबंधित गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है.
श्री बालाजी चैरिटेबल ब्लड सेंटर, आगरा: निरीक्षण में अनिवार्य एलिसा और स्टरलिटी परीक्षण नहीं किए जाने की बात सामने आई. रक्त प्राप्तकर्ताओं के नाम, हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर सहित पूरा विवरण दर्ज नहीं था. तापमान लॉग और स्टॉक रिकॉर्ड का भी समुचित रखरखाव नहीं पाया गया.
न्यू बापू रक्त सेंटर, अलीगढ़: अनिवार्य टीटीआई जांच और सीपीडीए सॉल्यूशन से संबंधित प्रक्रियाओं में कमियां पाई गईं. एलिसा परीक्षण भी नहीं . तापमान रिकॉर्डिंग ग्राफ, स्टॉक रजिस्टर, योग्य तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता और आवश्यक दस्तावेजों के रखरखाव में भी खामियां सामने आईं.
मानया चैरिटेबल ब्लड सेंटर, गोरखपुर: निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित मिले. तापमान रिकॉर्डिंग में अनियमितता के साथ अभिलेखों का रखरखाव भी अधूरा पाया गया.
अनुभव चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लखीमपुर खीरी: बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए आवश्यक अनुबंध उपलब्ध नहीं मिला. तापमान निगरानी और अलार्म सिस्टम में खामियां पाई गईं. रक्त बैग और डायग्नोस्टिक किट के स्टॉक रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं थे.
लिटल स्टार ब्लड सेंटर, Lucknow: प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारियों की लंबे समय से अनुपस्थिति सामने आई. एलिसा मशीन खराब होने के बावजूद बिना जांच रक्त एवं रक्त घटक जारी किए जाने की बात सामने आई. इसके अतिरिक्त, एफएफपी में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) के अंश भी पाए गए.
रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर, Lucknow: एलिसा जांच पूरी किए बिना रक्त जारी करने, एफएफपी को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत प्लेटलेट एजिटेटर में रखने, निर्धारित मूल्य से अधिक शुल्क वसूलने और कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसी अनियमितताएं पाई गईं.
केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर, Lucknow: प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित मिले. मास्टर रजिस्टर तथा एलिसा/टीटीआई परीक्षण रजिस्टर समय पर अद्यतन नहीं किए गए थे. परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई.
यूपीएफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब के अनुसार, जिन सात रक्त केंद्रों में अनियमितताएं मिली हैं, वहां रक्त एवं रक्त घटकों से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ अन्य निरीक्षित केंद्रों में पाई गई कमियों के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है. संबंधित केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं. संचालन पर रोक लगाए गए केंद्रों में उपलब्ध रक्त और रक्त घटकों के सुरक्षित निस्तारण के संबंध में विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को अलग से एडवाइजरी जारी की है.
इसका उद्देश्य निर्धारित मानकों के अनुरूप रक्त एवं रक्त घटकों का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करना है. एफएसडीए का जोर रक्त केंद्रों में नियमित निरीक्षण, अनिवार्य जांच, उचित भंडारण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही मरीजों की सुरक्षा को प्रभावित न करे.
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विकेटी/डीकेपी
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