यूपी में निवेश के लिए विदेशी कंपनियों को सीएम योगी का न्योता, वियतनाम से रूस और जापान तक के प्रतिनिधियों से राउंड-टेबल बैठक

ग्रेटर नोएडा, 26 सितंबर . उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण के उद्घाटन के बाद Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने सहभागी देशों के प्रतिनिधियों के साथ राउंड-टेबल बैठकें कीं. बैठकों में Chief Minister ने विभिन्न देशों के निवेशकों और कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश तथा कारोबार के विस्तार के अवसरों की जानकारी दी.

उन्होंने मोबाइल विनिर्माण, रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज, कृषि, मशीनरी और वुड टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया. Chief Minister ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ बड़ा उपभोक्ता बाजार, युवा मानव संसाधन, उपजाऊ भूमि और प्रचुर जल संसाधन उपलब्ध कराता है. इन क्षमताओं के चलते राज्य में विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों के लिए विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और कारोबार बढ़ाने के व्यापक अवसर हैं.

वियतनामी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में Chief Minister ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़े हवाई अड्डे का विकास हुआ है और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन शुरू होने की उम्मीद है.

Chief Minister योगी ने Lucknow, वाराणसी और नोएडा से हनोई तथा वियतनाम के अन्य प्रमुख शहरों के लिए सीधी हवाई कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावना भी रखी. उनके अनुसार इससे व्यापार के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है.

रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा में Chief Minister ने रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज को निवेश के प्रमुख क्षेत्र बताया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर स्थित है और Lucknow नोड में ब्रह्मोस विनिर्माण इकाई स्थापित की जा चुकी है. उन्होंने रूसी रक्षा कंपनियों को Kanpur में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया.

Chief Minister ने बताया कि रूसी मूल की एके-203 राइफल का भी उत्तर प्रदेश में निर्माण हो रहा है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास मेडिकल डिवाइस पार्क और बुंदेलखंड क्षेत्र में फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है. रूसी कंपनियों को ललितपुर में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क में अनुसंधान, विकास और निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए भी आमंत्रित किया गया.

सीएम योगी ने रूस के साथ कृषि और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की. उन्होंने उत्तर प्रदेश को देश की ‘फूड बास्केट’ बताते हुए कहा कि राज्य में विशाल उपजाऊ भूमि और पर्याप्त जल संसाधन हैं. इससे कृषि आधारित उद्योगों और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में निवेश के अवसर पैदा होते हैं.

बेलारूस के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में Chief Minister ने भारी एवं उन्नत मशीनरी के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश का न्योता दिया. उन्होंने विशेष रूप से बेलारूस की ट्रैक्टर कंपनियों को राज्य में असेंबली इकाइयां स्थापित करने का प्रस्ताव दिया.

Chief Minister ने ओडीओपी योजना का उल्लेख करते हुए सहारनपुर और बिजनौर के लकड़ी प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बेलारूस की आधुनिक वुड टेक्नोलॉजी को इन उत्पादन क्लस्टरों से जोड़कर स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, उत्पादकता और वैश्विक बाजार तक पहुंच को मजबूत किया जा सकता है.

जापान के राजदूत ओनो केइइची और जेट्रो इंडिया के चीफ डायरेक्टर जनरल डाइसाकु युकिता के साथ बैठक में आर्थिक विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और निवेश को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई. सारनाथ और जापान के नारा प्रीफेक्चर के बीच साझा बौद्ध विरासत के आधार पर संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया.

वहीं, सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग वी कुएन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल और प्रमुख निवेशकों के साथ Chief Minister ने आर्थिक एवं निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की. बैठक में प्रस्तावित सिंगापुर सिटी परियोजना की प्रगति पर भी विचार हुआ. सिंगापुर Government ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने में रुचि जताई.

राउंड-टेबल बैठकों के बाद Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न सहभागी देशों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ समूह फोटो में हिस्सा लिया. यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 25 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से राज्य की औद्योगिक, विनिर्माण और निर्यात क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है. ट्रेड शो के माध्यम से विदेशी निवेशकों को उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे, औद्योगिक इकोसिस्टम, क्षेत्रवार निवेश अवसरों और निर्यात क्षमता से परिचित कराया जा रहा है.

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पीकेटी/डीकेपी