
Lucknow, 16 अक्टूबर . नवरात्र में नारी शक्ति के सामर्थ्य और संकल्प की चर्चा के बीच उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं हर घर तक पहुंच रहे पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही हैं. जल जीवन मिशन के तहत प्रशिक्षित करीब पांच लाख महिलाएं फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से पानी की शुद्धता की जांच कर रही हैं.
सुजलाम शक्ति समूह के रूप में संगठित ये महिलाएं गांव-गांव में पेयजल की गुणवत्ता पर नजर रखने के साथ ग्रामीणों को सुरक्षित पानी के उपयोग और जल संरक्षण के प्रति जागरूक भी कर रही हैं. महिलाओं की इस भागीदारी से गांवों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था मजबूत होने के साथ उन्हें आय अर्जित करने का अवसर भी मिल रहा है. जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में हर घर पहुंच रहे पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए गांव स्तर पर मजबूत तंत्र तैयार किया गया है. इसके तहत करीब पांच लाख महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से पेयजल गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण दिया गया है.
जल जीवन मिशन 1.0 में प्रत्येक राजस्व गांव से पांच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया था. अब यही प्रशिक्षित महिलाएं जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुजलाम शक्ति समूह के रूप में गांवों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी कर रही हैं. एफटीके के जरिए जल गुणवत्ता जांच का बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक कुल 1,43,21,260 जल नमूनों का परीक्षण किया गया है. इनमें 2022-23 में 39,47,102, 2023-24 में 36,68,743, 2024-25 में 38,19,440, 2025-26 में 5,51,221 और 2026-27 में अभी तक 23,34,754 जल नमूनों की जांच की गई है.
सुजलाम शक्ति समूह के लिए स्वयं सहायता समूहों की प्रशिक्षित महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आशा कार्यकत्रियों को पात्रता के आधार पर प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध कराई जाती है. इसके माध्यम से पानी में आयरन, नाइट्रेट, क्लोराइड समेत विभिन्न अशुद्धियों की प्राथमिक स्तर पर जांच की जाती है. जल जीवन मिशन के तहत घरों तक पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जांच भारतीय मानक आईएस-10500:2012 के आधार पर की जाती है.
एफटीके प्रशिक्षित महिलाएं प्रत्येक माह एफएचटीसी (फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन), विद्यालय, आंगनवाड़ी केन्द्र,स्वास्थ्य केंद्र और हैंडपंप सहित विभिन्न स्रोतों से पेयजल के नमूनों की जांच करती हैं. जांच के लिए निर्धारित मानदेय के आधार पर महिलाओं को भुगतान भी किया जाता है. इस तरह सुजलाम शक्ति समूह पेयजल गुणवत्ता की निगरानी के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का माध्यम भी बन रहे हैं. जल निगम ग्रामीण के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रशिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता जांच के अलावा ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल के उपयोग, जल संरक्षण और वर्षा जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी दी जाती है.
सुजलाम शक्ति समूह की दक्ष महिलाओं को ग्राम स्तर पर गठित होने वाली जल समितियों में सदस्य के रूप में भी शामिल किया जाता है. जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर सुजलाम शक्ति समूहों का नेटवर्क तैयार किया गया है. यह नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी के साथ जल संरक्षण से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों में भी भूमिका निभा रहा है.
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता की जांच से जोड़कर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है. पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विभाग लगातार काम कर रहा है. जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में पेयजल आपूर्ति और गुणवत्ता निगरानी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और आगे निगरानी व्यवस्था तथा सेवा गुणवत्ता को और मजबूत किया जाएगा.
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विकेटी/एसके
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