यूएन ने की भारत के समर्थन वाले ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ नक्शे को अपनाने की सिफारिश, अमेरिका ने किया विरोध

संयुक्त राष्ट्र, 6 सितंबर . दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों और देशों के वास्तविक आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसे विश्व मानचित्र का समर्थन किया है, जो देशों और महाद्वीपों के असली आकार को बेहतर ढंग से दर्शाता है.

India के समर्थन से पारित एक प्रस्ताव में महासभा ने Friday को ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ वाले नक्शे को अपनाने की सिफारिश की. इसे उन लोकप्रिय नक्शों की जगह इस्तेमाल करने की बात कही गई है जो ‘मरकेटर प्रोजेक्शन’ पर आधारित हैं. ‘मरकेटर’ नक्शे में उत्तरी गोलार्ध के देशों का आकार वास्तविकता से बड़ा दिखता है.

इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 वोट पड़े. अमेरिका एकमात्र देश था जिसने इसका विरोध किया जबकि छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

‘मरकेटर प्रोजेक्शन’ का नाम 16वीं सदी के फ्लेमिश मानचित्रकार जेरार्डस मरकेटर के नाम पर रखा गया था. आज भी दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले कई नक्शे इसी पद्धति पर आधारित हैं.

मरकेटर ने यह नक्शा समुद्री यात्रा और नौवहन के लिए बनाया था, उस समय जब यूरोपीय देश अपने उपनिवेशों का विस्तार कर रहे थे. माना जाता है कि यह नक्शा उस दौर की दुनिया को देखने की सोच को भी दर्शाता था.

इस बदलाव के अभियान का नेतृत्व करने वाले टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी ने कहा, “नक्शे को सुधारने का मतलब है, यह स्वीकार करना कि दुनिया के हर क्षेत्र को सही और सम्मानजनक तरीके से दिखाया जाना चाहिए.”

इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन में India का स्वरूप लगभग वैसा ही रहता है जैसा अन्य नक्शों में दिखता है. सबसे स्पष्ट अंतर यह है कि India का प्रायद्वीपीय हिस्सा मरकेटर नक्शे की तुलना में थोड़ा कम कोणीय दिखाई देता है और थोड़ा अधिक फैला हुआ लगता है.

हालांकि, इस नए नक्शे में अमेरिका का आकार कुछ छोटा दिखाई देता है, जो अन्य देशों के मुकाबले उसके वास्तविक क्षेत्रफल को अधिक सही तरीके से दर्शाता है.

President डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह दृश्य बदलाव अमेरिका के लिए संवेदनशील मुद्दा बन गया. ट्रंप कई बार कनाडा और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों पर नियंत्रण की बात कर चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की उप-प्रतिनिधि यारयना फेरेंसेविच ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए इसे ‘एक बड़े और अधिक कट्टर वैचारिक परियोजना’ का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह की कोशिशों से संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है.

इसके जवाब में टोगो के विदेश मंत्री डुसे ने कहा, “हमारा दृष्टिकोण किसी देश, किसी सभ्यता या किसी मानचित्रण परंपरा के खिलाफ नहीं है.”

उन्होंने आगे कहा, “एक अधिक न्यायसंगत नक्शा दुनिया की भौगोलिक स्थिति को नहीं बदलता, बल्कि यह बदलता है कि हम दुनिया को कैसे देखते हैं. और जब हमारी सोच अधिक निष्पक्ष होती है, तो देशों के बीच बेहतर समझ, सम्मान और शांति का रास्ता खुलता है.”

मरकेटर नक्शों में रूस का आकार काफी बड़ा दिखाई देता है, जबकि ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ में उसका आकार काफी कम हो जाता है. इसके बावजूद रूस ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे उपनिवेशवाद-विरोधी कदम बताया.

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव केवल सलाहकारी है. इसके तहत किसी भी देश या संस्था के लिए मर्केटर नक्शों को छोड़कर इक्वल अर्थ नक्शे अपनाना अनिवार्य नहीं है.

यूरोपीय संघ, जिसने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल शिक्षा, जागरूकता और भूगोल संबंधी समझ को बेहतर बनाना है. Friday को फ्रांस के विदेश मंत्री ने भी घोषणा की कि उनका देश मरकेटर नक्शों का इस्तेमाल छोड़ रहा है.

पेरिस के सोरबोन विश्वविद्यालय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय अब ऐसे नक्शों का उपयोग करेगा जो अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए हों और पृथ्वी के वास्तविक क्षेत्रफल को अधिक सही तरीके से दिखाते हों.

मरकेटर नक्शों की विकृतियां कई जगह साफ दिखाई देती हैं. उदाहरण के लिए, ग्रीनलैंड को अक्सर अफ्रीका के लगभग बराबर आकार का दिखाया जाता है जबकि वास्तविकता में अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है. इसी तरह यूरोप को कई नक्शों में दक्षिण अमेरिका से बड़ा दिखाया जाता है जबकि दक्षिण अमेरिका का वास्तविक क्षेत्रफल यूरोप से लगभग 75 प्रतिशत अधिक है.

एवाई/पीएम