
संयुक्त राष्ट्र, 25 सितंबर . विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर आयोजित बैठक में समुद्री व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर बढ़ते हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताया. उन्होंने कहा कि India और लाइबेरिया ने मिलकर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ की शुरुआत की है, ताकि वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जा सके.
जयशंकर ने कहा कि दो दिन पहले ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले मालवाहक जहाज एमवी केप डव पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई. इससे 10 दिन पहले होर्मुज स्ट्रेट में पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गया पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया.
उन्होंने कहा कि ये घटनाएं अब अपवाद नहीं रह गई हैं. इस साल काला सागर, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में नागरिक जहाजों पर कई हमले हुए हैं. उन्होंने काला सागर में हुए दो हमलों का भी जिक्र किया, जिनमें भारतीय नाविकों की जान गई.
जयशंकर ने कहा कि इन हमलों के शिकार सिर्फ भारतीय नहीं हैं, बल्कि कई अन्य देशों के नाविक भी इस साल मारे गए हैं. उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों पर हमले, समुद्री व्यापार में बाधा और निर्दोष लोगों की मौत किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराई जा सकती.
विदेश मंत्री ने बताया कि दुनिया का अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिदिन 140 अरब डॉलर से अधिक का है और इसका 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है. दुनिया के व्यापारी जहाजों पर करीब 20 लाख नाविक काम करते हैं, जिन्हें लंबे समय तक जहाज पर रहने, परिवार से दूर रहने और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है.
उन्होंने कहा कि जहाज का झंडा और चालक दल की राष्ट्रीयता अक्सर अलग-अलग होती है, इसलिए Governmentों के बीच समन्वित कार्रवाई जरूरी है. India दुनिया में नाविकों का बड़ा स्रोत है, जबकि लाइबेरिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा शिपिंग रजिस्टर है.
जयशंकर ने बताया कि यह नया समूह जहाज मालिक देशों, बड़े शिपिंग रजिस्टर वाले देशों और नाविक उपलब्ध कराने वाले देशों के लिए सहयोग का मंच होगा. उन्होंने सदस्य देशों से इसकी कार्यप्रणाली और भविष्य की रूपरेखा तय करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया.
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में India की मेजबानी में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में Prime Minister Narendra Modi ने नाविकों के लिए एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा था, जो समुद्री प्राधिकरणों और दूतावासों को जोड़कर संकट की स्थिति में मेडिकल सहायता, परिवारों को सूचना और निकासी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा सके.
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डीएससी
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