
उज्जैन, 18 सितंबर . सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी, New Delhi के वाइस-चांसलर प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने युवा धर्म संसद, जेन-जी और युवाओं पर पश्चिमी प्रभाव के बारे में मोहन भागवत की टिप्पणियों पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की.
युवा धर्म संसद पर सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान जेनजी के धर्म से अलग होते दिखने के सवाल पर उन्होंने कहा, “ऐसा कुछ नहीं है. हमें यह समझने की जरूरत है कि युवाओं की ताकत का इस्तेमाल कैसे किया जाए. युवाओं की ताकत के बिना कोई देश नहीं बन सकता. India एक युवा देश है. जेनजी यहां है, और अब जेन अल्फा भी आ गया है. हमें उनसे बातचीत करनी चाहिए और उनकी बात सुननी चाहिए. मेरा मानना है कि यह बातचीत से ही हो सकता है. हमें युवाओं और आज के जेन अल्फा की बात भी सुननी चाहिए.”
उन्होंने कहा कि सपने हमेंशा भविष्य से आते हैं और बुजुर्ग स्वप्न नहीं देख सकते. स्वप्न देखने वाला युवा समाज हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. युवा स्वप्न है और बुजुर्ग अनुभव. अगर दोनों को जोड़ा जाए तो शायद वहीं बात धर्म संसद में हो रहा है. दोनों के संवाद से नयापन निकलेगा.
संघ प्रमुख मोहन भागवत के पश्चिमी प्रभाव के बारे में की गई टिप्पणी को लेकर उन्होंने कहा कि किसी देश को दूसरे के प्रभाव में नहीं आना चाहिए. पश्चिमी देशों के विचारों के द्वारा हम पूरा जीवन नहीं बिता सकते है. स्वधर्म को छोड़कर हम पाश्चात्य नहीं बन सकते हैं.
प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा,” पूज्य मिथिलेश नंदनी शरण महाराज के मार्गदर्शन में हमारी यात्रा में युवाओं को धर्म के साथ जोड़ने का प्रयास चल रहा है. यह इसका छठा संस्करण है. उज्जैन का महाकाल से गहरा नाता रहा है और यह भारतीय समय-गणना का केंद्र रहा है. अब युग बदलने का समय आ गया है. हमें सिर्फ समय के साथ नहीं चलना चाहिए बल्कि एक नया युग बनाना चाहिए और समय से भी आगे निकलना चाहिए. हमें यह प्रेरणा इसी क्षेत्र से मिलती है.”
उन्होंने कहा कि India युग निर्माता होगा और नए काल की सृष्टि होगी. मुझे लगता है कि यह संवाद संकल्प कार्यसिद्धि की ओर, कार्यसिद्धि लक्ष्य की ओर हम जाएंगे.
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एएसएच/पीएम
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