मैसूर में वोटर लिस्ट से 1 लाख नाम हटाने की साजिश, अल्पसंख्यक-दलितों को बनाया जा रहा निशाना : तनवीर सैत

मैसूर, 2 अक्टूबर . कर्नाटक के मैसूर स्थित नरसिम्हा राजा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने आरोप लगाया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में 10,000 से ज्यादा फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, जिससे करीब एक लाख मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने इस मामले में शिकायत दर्ज कराकर First Information Report कराई है और जांच की मांग की है.

से बातचीत में कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने कहा, “मैसूर के नरसिम्हा राजा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रतिनिधियों ने करीब दस हजार से अधिक फॉर्म-7 दाखिल किए हैं.”

उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत हर जगह इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है. कर्नाटक में जब से यह प्रक्रिया शुरू हुई है, कांग्रेस पार्टी लगातार यही कह रही है कि जो वास्तविक मतदाता हैं और जो इसके हकदार हैं, उनका नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए. इसके बावजूद मेरे विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई है. लगभग एक लाख मतदाताओं के नाम मेरे निर्वाचन क्षेत्र से हटाने का प्रयास किया गया है.”

विधायक ने बताया कि किस तरह बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. उन्होंने कहा, “10 हजार से ज्यादा फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं. इसका इस्तेमाल सही है या गलत, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन एक-एक मतदान केंद्र पर 100, 150 और 200 तक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. जिन लोगों ने ये फॉर्म भरे हैं, उनका उस क्षेत्र से कोई संबंध भी नहीं है.”

तनवीर सैत ने कहा, “इसी कारण हमने आपत्ति दर्ज कराई है और Police में शिकायत भी की है. दो थानों में First Information Report दर्ज हुई है. हमने मांग की है कि इस मामले में जल्द से जल्द जांच शुरू की जाए और सच्चाई सामने लाई जाए.”

उन्होंने इस पूरे मामले के लिए भाजपा और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए यह भाजपा और आरएसएस की कार्यप्रणाली है. जहां-जहां कांग्रेस जीतती आ रही है, वहां इस तरह की रणनीति अपनाई जा रही है. भाजपा और आरएसएस का काम ही चुनाव जीतने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाना है. लोगों को जोड़ने के लिए उनके पास कोई कार्यक्रम या योजना नहीं है. वे लोगों को बांटकर चुनाव जीतना चाहते हैं.

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पीआईएम/एबीएम