
चेन्नई, 7 नवंबर . तमिलनाडु के Chief Minister सी. जोसेफ विजय ने Prime Minister Narendra Modi से आग्रह किया है कि कावेरी नदी पर कर्नाटक की प्रस्तावित मेकदातु बांध परियोजना को तब तक कोई वैधानिक या प्रशासनिक मंजूरी नहीं दी जाए, जब तक कावेरी बेसिन के सभी राज्यों की सहमति प्राप्त नहीं हो जाती.
Chief Minister ने चेतावनी दी कि इस परियोजना से तमिलनाडु के किसानों की आजीविका पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. 6 नवंबर को लिखे पत्र में विजय ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध के निर्माण को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और केंद्र Government से तमिलनाडु के वैध जल अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया.
Chief Minister की यह पहल कर्नाटक में प्रस्तावित बांध स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे केंद्र Government के अधिकारियों के हालिया दौरे के बाद सामने आई है. इन अधिकारियों ने परियोजना की व्यवहार्यता का जायजा लिया था. विजय ने सवाल उठाया कि जब कावेरी बेसिन के राज्यों के बीच परियोजना को लेकर विवाद बना हुआ है, तो ऐसे में स्थल निरीक्षण करने का फैसला क्यों लिया गया.
उन्होंने कहा कि संबंधित राज्यों की आवश्यक सहमति के बिना परियोजना को मंजूरी देने की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम पहले से तय जल-बंटवारे की व्यवस्था और संघीय सिद्धांतों को कमजोर करेगा.
Chief Minister ने कहा कि कावेरी नदी तमिलनाडु के लिए सिंचाई और पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है. खासकर कृषि प्रधान डेल्टा जिलों में हजारों किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए नदी के पानी पर निर्भर हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि मेकदातु बांध का एकतरफा निर्माण होने से निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. इससे कृषि गतिविधियों और किसानों की आर्थिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है.
विजय ने Prime Minister से आग्रह किया कि केंद्र का कोई भी मंत्रालय, विभाग या वैधानिक प्राधिकरण तमिलनाडु की आपत्तियों पर विचार किए बिना और संबंधित राज्यों की सहमति प्राप्त किए बिना कर्नाटक Government की इस परियोजना को मंजूरी या प्रशासनिक समर्थन न दे.
Chief Minister ने मौजूदा कावेरी जल प्रबंधन व्यवस्था का पालन करने और यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि नदी के निचले हिस्से में स्थित राज्यों के अधिकारों से समझौता न हो.
उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय नदी विवादों से निपटने में केंद्र Government की जिम्मेदारी निष्पक्ष और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने की है, खासकर तब जब किसानों और कृषि समुदायों की आजीविका इससे जुड़ी हो.
मेकदातु परियोजना लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का विषय रही है. तमिलनाडु लगातार ऐसी किसी भी परियोजना का विरोध करता रहा है, जिससे कावेरी नदी के पानी में उसके हिस्से पर संभावित असर पड़ सकता है.
विजय के ताजा पत्र के बाद इस विवाद पर Political बहस तेज होने की संभावना है. साथ ही तमिलनाडु के सिंचाई हितों और दीर्घकालिक जल सुरक्षा की रक्षा के लिए कड़े उपायों की मांग भी फिर उठ सकती है.
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