मुरलीकांत पेटकर: पैरालंपिक में भारत को दिलाया पहला गोल्ड मेडल, पाकिस्तान से हुए युद्ध में देश के लिए खाईं 9 गोलियां

New Delhi, 31 अक्टूबर . खेल के मैदान में कुछ खिलाड़ी ऐसे सामने आते हैं, जिनका जीवन अपने आप में प्रेरणादायक बन जाता है. ऐसा ही एक नाम मुरलीकांत पेटकर भी है, जिन्होंने अपनी जिंदगी में बड़ी से बड़ी चुनौतियों को हराकर देश के लिए पैरालंपिक में पहला गोल्ड मेडल जीता.

मुरलीकांत पेटकर का नाम 1 नवंबर 1944 में Maharashtra के सांगली जिले के पेठ इस्लामपुर गांव में हुआ. बचपन से ही मुरलीकांत की खेलों में खास दिलचस्पी थी. वह अपनी मजबूत कद-काठी के दम पर भारतीय सेना में शामिल हो गए. इसके बाद उन्होंने बॉक्सिंग के खेल में अपना करियर बनने की ठानी. मुरलीकांत के पंचों में काफी दम था और वह इस खेल में लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे. 1964 में इंटरनेशनल सर्विसेज स्पोर्ट्स मीट में भी उन्हें सेना की तरफ से खेलना का मौका मिला.

मुरलीकांत के लिए सबकुछ सही चल रहा था, लेकिन 1965 में India और Pakistan के बीच हुए युद्ध ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह से पलटकर रख दिया. Pakistan की तरफ से अचानक हुए हवाई हमले में मुरलीकांत को 9 गोलियां लगीं और एक टैंकर भी उनके ऊपर से गुजर गया. इस हादसे के चलते मुरलीकांत कई महीनों तक जिंदगी और मौत के बीच में जूझते रहे. एक गोली रीढ़ की हड्डी में लगने की वजह से वह दोबारा अपने पैरों पर नहीं खड़े हो सके.

हालांकि, मुरलीकांत ने इसके बावजूद हार नहीं मानी. उन्होंने बॉक्सिंग का साथ छूटने के बाद तैराकी में बतौर पैरा खिलाड़ी करियर बनाने की ठानी. धीरे-धीरे इस खेल में भी मुरलीकांत रम गए और अपने प्रदर्शन के बूते सुर्खियां बटोरने लगे. नेशनल लेवल पर मिली कामयाबी के बाद उन्होंने कई इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में भी हिस्सा लिया.

हालांकि, उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि साल 1972 में आई, जब वह जर्मनी की धरती पर हुए पैरालंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीते. वह India की ओर से पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने. 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी स्पर्धा में उन्होंने यह गोल्ड अपने नाम किया. साल 2018 में Government ने उन्हें पद्मश्री और 2025 में लाइफटाइम अर्जुन पुरस्कार से नवाजा.

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एसएम/डीकेपी