
New Delhi, 12 अक्टूबर . मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. Samajwadi Party के सांसद रामजी लाल सुमन और जिया उर रहमान बर्क ने भी चुनाव आयोग के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए विरोध जारी रखने की बात कही. वहीं, जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने भी एसआईआर के दौरान कथित अनियमितताओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों को लेकर चिंता व्यक्त की.
उत्तर प्रदेश के बरेली में Samajwadi Party के सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर जनता में विरोध है. उन्होंने कहा कि विपक्ष के अलावा युवा, छात्र, बुद्धिजीवी और वकील जैसे समाज के विभिन्न वर्ग भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना कर रहे हैं. यह मुद्दा केवल Political दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्ग भी इस पर अपनी नाराजगी जता रहे हैं.
सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि वह अपनी पार्टी और अखिलेश यादव के साथ शुरुआत से ही इस विरोध में शामिल रहे हैं. उन्होंने इसे जनता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सभी वर्गों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की. बर्क ने कहा कि विपक्ष जरूरी इस्तीफों की मांग कर रहा है, लेकिन संबंधित पदाधिकारी अब तक इस्तीफा देने से इनकार कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना प्रयास जारी रखेगा.
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि देशभर में एसआईआर को लेकर नाराजगी है. उन्होंने दावा किया कि बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि उसका कामकाज संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं दिखाई देता.
उन्होंने कहा कि दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जा रहे हैं, लेकिन Government उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है. सलीम इंजीनियर ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों, ट्रेनों के रद्द होने और मेट्रो स्टेशनों के बंद किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई थी.
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