मुंबई में माहौल खराब करने वालों पर हो कार्रवाई, भाषा के नाम पर मारपीट गलत: वारिस पठान

Mumbai , 31 अगस्त . एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने गणेश प्रतिमा पर अंडे फेंके जाने की घटना, Mumbai में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के बाद हुए विवाद, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान, Prime Minister Narendra Modi को उज्बेकिस्तान में मिले सम्मान, हिंदी-मराठी भाषा विवाद और छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार को लेकर Supreme Court की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी.

गणेश प्रतिमा पर अंडे फेंके जाने की घटना के बाद Mumbai Police के साथ हुई बैठक को लेकर वारिस पठान ने बताया कि उनकी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने Mumbai Police के अधिकारियों से मुलाकात की. लालबाग-परेल इलाके में जुलूस के बाद कुछ लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया. कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर गंभीर आरोप लगाए हैं और इस संबंध में कई वीडियो भी सामने आए हैं. उन्होंने Police से मांग की कि वीडियो की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ First Information Report दर्ज की जाए. पठान ने कहा कि Mumbai का माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए उस बयान पर भी पठान ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वालों को हिंदू नहीं मानने की बात कही गई. उन्होंने इसे ‘डबल स्टैंडर्ड’ बताते हुए सवाल उठाया कि यदि आरएसएस प्रमुख ऐसी सोच का विरोध करते हैं तो India में भी नफरत फैलाने वाले बयानों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती. उन्होंने आरएसएस की विचारधारा और उसके नेताओं पर भी तीखी Political टिप्पणी की.

Prime Minister मोदी को उज्बेकिस्तान में मिले सम्मान पर वारिस पठान ने कहा कि जिस क्षेत्र से मुगल शासक बाबर का संबंध रहा है, वहीं से Prime Minister को सम्मान मिलना उन लोगों के लिए जवाब है जो देश में बाबर के नाम को लेकर Political बयानबाजी करते हैं. पठान ने कहा कि लोगों को नफरत की राजनीति छोड़कर देश और समाज को आगे बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए.

राज ठाकरे पर हिंदी-मराठी भाषा विवाद को कथित तौर पर हवा देने का आरोप लगाते हुए पठान ने कहा कि वह मराठी भाषा का सम्मान करते हैं और Maharashtra में रहने वाले लोगों को मराठी सीखनी चाहिए. लेकिन, भाषा के नाम पर किसी के साथ मारपीट या दबाव बनाना गलत है. उन्होंने आगे कहा कि Mumbai में उत्तर प्रदेश, बिहार, Gujarat समेत विभिन्न राज्यों से लोग रोजगार के लिए आते हैं. ऐसे लोगों को मराठी सीखने के लिए समय दिया जाना चाहिए. गरीब और कमजोर लोगों पर ही कथित तौर पर दबाव बनाया जाता है. यदि भाषा का मुद्दा है तो बड़े उद्योगपतियों और फिल्मी सितारों पर भी समान रवैया अपनाया जाना चाहिए.

Supreme Court के एक जज की उस टिप्पणी पर भी पठान ने समर्थन जताया, जिसमें छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार को लेकर बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को Government की नीतियों पर सवाल करने का संवैधानिक अधिकार है. पठान ने कहा कि India लोकतांत्रिक देश है और यदि कोई छात्र या नागरिक Government के किसी फैसले से असहमत है तो वह सवाल कर सकता है. उन्होंने युवाओं, विशेषकर जेनजी, को अपने अधिकारों और संविधान को समझने वाला जागरूक वर्ग बताया.