मुंबई में प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल के आरोप पर एनएचआरसी ने लिया संज्ञान

New Delhi, 3 अक्टूबर . राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 2 अक्टूबर को Mumbai में हुए एक कथित अवैध प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और बाद में उनकी तस्वीरें व वीडियो social media पर प्रसारित किए जाने के मामले में संज्ञान लिया है. आयोग ने यह संज्ञान मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत लिया है. मामले की सुनवाई एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने की.

शिकायत में social media पर सामने आई कथित तस्वीरों और वीडियो का हवाला दिया गया है, जिनमें एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाकर रखा गया दिखने और कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाए जाने का उल्लेख है. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नाबालिगों की भागीदारी को लेकर पहले से ही कुछ ग्रुप और चैट में चर्चा की गई थी. इसमें आशंका जताई गई है कि बच्चों की नाबालिग स्थिति का इस्तेमाल Police की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ढाल के तौर पर किया गया हो सकता है.

एनएचआरसी ने Mumbai के Police आयुक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, India में एक्स कॉर्प के ग्रिवांस ऑफिसर और Maharashtra के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है.

आयोग ने Mumbai Police को तस्वीरों, वीडियो, social media सामग्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करने तथा किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा होने पर First Information Report दर्ज करने का निर्देश दिया है. Police को यह भी पता लगाने को कहा गया है कि बच्चे किन परिस्थितियों में प्रदर्शन में शामिल हुए और आयोजकों, समन्वयकों, साथ आए वयस्कों तथा उनकी भागीदारी में मदद करने वाले अन्य लोगों की क्या भूमिका थी.

एनएचआरसी ने कथित ग्रुप और चैट से जुड़े डिजिटल संचार को सुरक्षित रखने और उसकी फोरेंसिक जांच कराने का भी निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या नाबालिगों की भागीदारी की पहले से योजना बनाई गई थी और क्या उनकी नाबालिग स्थिति का इस्तेमाल Police की कानूनी कार्रवाई से बचने, उसे सीमित करने या हतोत्साहित करने के लिए किया गया.

आयोग ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 और 83(2) सहित अन्य लागू कानूनों के तहत प्रावधानों की संभावित लागूता की भी जांच करने को कहा है. साथ ही, बच्चों से संबंधित तस्वीरों और वीडियो के प्रसार तथा इन्हें प्रसारित करने वाले social media अकाउंट की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं.

एक्स कॉर्प और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा बच्चों की सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और लागू वैधानिक दायित्वों के अनुपालन की जांच करने को कहा गया है.

एनएचआरसी ने Maharashtra के महिला एवं बाल विकास विभाग को किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों के बचाव, देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. जरूरत पड़ने पर बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर काउंसलिंग, मनोसामाजिक सहायता, देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास उपलब्ध कराने को कहा गया है.

आयोग ने पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, निजता, गरिमा और सर्वोत्तम हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी गई है.

एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि लगाए गए आरोपों की जांच संबंधित अधिकारी करेंगे और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा.

–

डीएससी