मुंबई : कूपर अस्पताल में बुर्का पहनने की वजह दो महिलाओं को एंट्री से रोकने का आरोप, नेताओं ने की आलोचना

Mumbai , 1 सितंबर . Mumbai के कूपर अस्पताल के प्रसूति (मेटरनिटी) वार्ड में कथित तौर पर बुर्का पहनने के कारण दो महिलाओं को प्रवेश नहीं दिए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. इसकी विभिन्न Political दलों के नेताओं ने आलोचना की है.

एक दिन पहले, अधिवक्ता जहांआरा ने को बताया था कि उन्हें बुर्का पहनने के कारण मेटरनिटी वार्ड में जाने से रोका गया.

उन्होंने दावा किया, “मैंने बात की और अपना परिचय भी दिया, लेकिन फिर भी मुझे रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि आप कोई भी हों, हम आपको बुर्का पहनकर अंदर नहीं जाने देंगे. जब मैंने वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि बुर्का पहनकर अंदर आने वाले लोग बच्चों को चुरा लेते हैं.”

दूसरी महिला, अधिवक्ता जहरा शेख ने Tuesday को कहा कि social media पर वायरल हो रहे वीडियो असली हैं.

उन्होंने से कहा, “मेरे साथ भी अंधेरी स्थित कूपर अस्पताल में यही घटना हुई. मैं अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी. मेटरनिटी वार्ड के बाहर सुरक्षा कर्मियों ने मुझसे कहा कि अंदर जाने से पहले बुर्का उतारना होगा. मैंने उन्हें अपना चेहरा दिखाया और जब कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा कारणों से है.”

इस घटना की निंदा करते हुए एनसीपी (शरद पवार) की प्रवक्ता विद्या चव्हाण ने कहा, “अगर उनका धर्म उन्हें बुर्का पहनने की अनुमति देता है, तो किसी चौकीदार या व्यक्ति को पूछने का अधिकार नहीं है कि वे बुर्का क्यों पहन रही हैं? भारतीय संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है.”

उन्होंने कहा, “मुस्लिम महिलाओं को इस तरह परेशान करना गलत है.”

Mumbai की मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगी. उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह पूरी तरह गलत है. यह बुनियादी मानवता का मामला है. यह बृहन्Mumbai महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पताल है, हालांकि ऐसी घटना किसी भी अस्पताल में नहीं होनी चाहिए. अस्पताल किसी व्यक्ति को उसके धर्म, चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या किसी अन्य धर्म का, उसके आधार पर आंकने की जगह नहीं है.”

उन्होंने कहा कि किसी बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.

कांग्रेस नेता चरण सिंह सप्रा ने भी इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया.

वहीं, एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “इस तरह का व्यवहार देश के लिए नुकसानदायक है. जो लोग रोजाना मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं, वे बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं को निशाना बना रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “मुस्लिम महिलाएं बुर्का और हिजाब पहनती हैं और आगे भी पहनती रहेंगी. उन्हें रोका नहीं जा सकता. हम मांग करते हैं कि सिर्फ बुर्का पहनने के कारण महिला को अस्पताल में प्रवेश से रोकने वाले constable के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.”

सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर वारिस पठान ने कहा, “बीएमसी को अपने संसाधनों से अधिक संख्या में cctv कैमरे लगाने चाहिए.”

शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि कोई भी जानबूझकर ऐसा काम नहीं करेगा. हर व्यक्ति को अपने धर्म की परवाह किए बिना पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना भी नगर निगम और अस्पताल की जिम्मेदारी है.

एएमटी/एबीएम