
मास्को, 29 सितंबर . रूस में India के राजदूत विनय कुमार ने Tuesday को रूस के उप-विदेश मंत्री मिखाइल गलुजिन से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंडे के मौजूदा मुद्दों पर बातचीत की और यूक्रेन की स्थिति पर “गहराई से” चर्चा की.
रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि भारतीय राजनयिक को मौजूदा हालात पर मास्को के नजरिए के बारे में जानकारी दी गई.
बयान में कहा गया, “इस बात पर जोर दिया गया कि कीव Government और उसके यूरोपीय समर्थकों की नीतियां Political और कूटनीतिक समाधान में बाधा डालती हैं और अजोव-काला सागर क्षेत्र सहित सैन्य तनाव को बढ़ाती हैं. उनकी ये नीति स्वीकार्य नहीं हैं. साथ ही, संकट के मूल कारणों को दूर करके इसके निष्पक्ष और स्थायी समाधान की जरूरत पर मास्को के सैद्धांतिक रुख को भी दोहराया गया. ये मूल कारण मुख्य रूप से पश्चिम की उस मंशा से जुड़े हैं, जिसके तहत वह यूक्रेन को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करके रूस को ‘रणनीतिक हार’ देना चाहता है.”
रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि विचारों का यह “जीवंत आदान-प्रदान” दोस्ताना माहौल में हुआ, जो रूस और India के बीच ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ की खासियत है.
पिछले हफ्ते, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की बैठक में India और रूस ने अपनी “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त” रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया.
‘एक्स’ पोस्ट में, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि दोनों ने “कई मौजूदा मुद्दों” पर विचारों का आदान-प्रदान किया और द्विपक्षीय संबंधों तथा ब्रिक्स समूह के भीतर सहयोग की स्थिति की समीक्षा की.
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब India और रूस रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और बहुपक्षीय समन्वय पर मिलकर काम कर रहे हैं.
कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बातचीत से New Delhi की उस मंशा का पता चलता है जिसके तहत वह मास्को के साथ बातचीत जारी रखना चाहती है, भले ही यूक्रेन संघर्ष और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते समीकरणों के कारण वैश्विक भू-राजनीति में अस्थिरता बनी हुई है.
India ने विवादों को सुलझाने में संवाद और कूटनीति के महत्व पर लगातार जोर दिया है, साथ ही पश्चिमी साझेदारों और रूस जैसे पारंपरिक सहयोगियों के साथ अपने संबंधों में संतुलन भी बनाए रखा है.
विदेश मंत्री जयशंकर और लावरोव ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नियमित रूप से मिलते रहे हैं. उनकी चर्चाओं में अक्सर क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और बहुपक्षीय संस्थाओं में सहयोग जैसे मुद्दे शामिल होते हैं.
17 सितंबर को, पुतिन ने Prime Minister Narendra Modi को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई दी थी और दोनों देशों के बीच ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की थी. “
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केआर/
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