
New Delhi, 28 अगस्त . महिला आरक्षण बिल को लेकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर सीपीआई नेता एनी राजा ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि रिजिजू गलत बात कह रहे हैं, क्योंकि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से यह बिल पहले ही पास होकर कानून बन चुका है; अब सवाल उसके लागू करने का है.
एनी राजा ने आरोप लगाया कि भाजपा इसे लागू नहीं करना चाहती क्योंकि वह महिलाओं के समान अधिकारों में विश्वास नहीं करती और नहीं चाहती कि महिलाएं देश की सबसे बड़ी फैसला लेने वाली संस्था में बैठकर कानून बनाएं.
महिला आरक्षण बिल को लेकर सीपीआई की नेता एनी राजा ने कहा, “संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू गलत बात कह रहे हैं. मैं यह इसलिए कह रही हूं क्योंकि महिलाओं के अधिकारों पर बिल 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के नाम से पहले ही पास हो चुका है. तो, यह अब एक कानून है, लेकिन मुद्दा इसे लागू करने का है.”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा इस कानून को लागू नहीं करना चाहती क्योंकि वे महिलाओं के समान अधिकारों में विश्वास नहीं करते. इसीलिए वे नहीं चाहते कि महिलाएं देश की सबसे बड़ी फैसले लेने वाली संस्था में बैठें और देश के लिए कानून बनाएं.
एनी राजा ने कहा, “पिछले 30 सालों से, 1996 से महिलाएं महिला आरक्षण के लिए लड़ रही हैं. कई बार, 2010 में एक सदन में बिल पास भी हो चुका है. लेकिन अब, मंत्री भी यही कह रहे हैं. इस देश की महिलाओं को सच बताओ, आप उनसे बिल पास होने का इंतजार क्यों करने को कह रहे हैं? कानून तो पहले ही पास हो चुका है. आपको इसे लागू करना होगा, और आपने जो शर्तें लगाई हैं, उन्हें हटाना होगा. यह एक सीधी-सी बात है.”
इसे लेकर सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा, “संसद के दोनों सदनों को स्थगित कर दिया गया है, लेकिन उन्हें स्थगित नहीं किया गया है. इससे कई अटकलें लगाई जा रही हैं. Government क्या करने जा रही है? और किरेन रिजिजू ने कुछ भी साफ नहीं किया है. Prime Minister ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है. उनका इरादा क्या है? इतने सारे अटकलें पब्लिक डोमेन में हैं. और Government पब्लिक डोमेन में सभी अटकलों के लिए जिम्मेदार है.”
वहीं, नेपाल त्रासदी को लेकर उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही पर गहरा दुख जताती है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं, सैकड़ों लोग लापता हैं, इधर-उधर फंसे हुए हैं. इनमें सैकड़ों भारतीय नागरिक भी हैं. वे नहीं जानते कि कहां जाएं, क्या कर रहे हैं, उनके साथ क्या हो रहा है, किसी को नहीं पता.
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डीएससी
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