महिलाओं की जमीन हड़पने के लिए लैंड जिहाद, यूसीसी से ही रुकेगा: विजय शर्मा

रायपुर, 5 अक्टूबर . पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की कवायद तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने की तैयारी के बीच छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने लैंड जिहाद को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इसे अनुसूचित जनजाति समाज के अधिकारों और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया.

छत्तीसगढ़ के उपChief Minister विजय शर्मा ने कहा, “जगदलपुर में 5 से 7 अक्टूबर तक कैंप लगाया जा रहा है. नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिलों के गांवों में ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि उन लोगों की पहचान की जा सके जो आईईडी धमाकों या अन्य कारणों से दिव्यांग हो गए हैं और मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. यहां एक बड़ा कैंप लगाया गया था, जहां कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण पाने के लिए 3600 लोगों का रजिस्ट्रेशन किया गया है.”

उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग बड़ा है और पूरे संभाग को कवर करना है, साथ ही नक्सलवाद के इस दंश को समाप्त करना है, इसलिए 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजन किया जाएगा. इसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के सभी गांवों में ग्राम पंचायत और ग्राम सभा कर लोगों को एकत्रित किया जा रहा है.

डिप्टी सीएम ने बताया कि इसमें अब तक हजार से ज्यादा पंजीयन हो चुके हैं. Chief Minister विष्णु देव साय ने भी Monday को इसे ऑनलाइन संबोधित किया है. बस्तर में लोग अब नक्सलवाद के इस दंश को भूल जाएंगे. आईईडी ब्लास्ट से जिनके पैर कटे हैं, उन सभी लोगों की सहायता के लिए आज साय Government खड़ी है.

उन्होंने एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मैंने Supreme Court के जज का बयान देखा है, और मेरा मानना ​​है कि यह एक पारंपरिक और बुनियादी सिद्धांत है: अपराधियों को Police को देखकर डर लगना चाहिए, जबकि कानून का पालन करने वाले नागरिकों को Police को देखकर भरोसा और विश्वास महसूस होना चाहिए.

डिप्टी सीएम ने कहा कि Supreme Court के जज ने इसी सिद्धांत का जिक्र किया है. मेरा यह मानना ​​है कि इसे लागू किया जाना चाहिए और इसे पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाना चाहिए.

पश्चिम बंगाल में यूसीसी को लेकर उन्होंने कहा कि जिसे लैंड जिहाद कहा जा रहा है, उसका अर्थ यह है कि यदि किसी व्यक्ति को एक से अधिक विवाह करने की स्वतंत्रता होती है तो वह विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति समाज की महिलाओं से विवाह कर उनकी संपत्तियों को हड़पने का काम करता है.

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह दूसरी शादियां भी हो जाती हैं, और कालांतर में वह संपत्ति, चाहे शहर की हो या जैसी भी हो, वह संपत्ति अनुसूचित जनजाति परिवारों के पास नहीं रह जाती. यह मूलतः संविधान की भावना के विपरीत चला जाता है, इसलिए यदि इसे समझकर इस विषय पर काम करना शुरू किया गया है और कोई समाधान खोजा गया है तो यह अच्छी बात है.

इसके अलावा, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने यूसीसी को लेकर कहा, “अगर इसे लागू किया गया तो क्या होगा? क्या आसमान गिर पड़ेगा? क्या देश बंट जाएगा? कई राज्यों में यूसीसी पहले से ही लागू है तो इससे क्या फर्क पड़ता है? अगर भाजपा इसे चाहती है तो उन्हें इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए.”

कांग्रेस नेता ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग क्यों लागू किया जाए? सभी से बात करें. हमारा देश ‘विविधता में एकता’ वाला देश है. यहां अलग-अलग धर्मों और भाषाओं के लोग रहते हैं. उनकी अपनी परंपराएं और संस्कृतियां हैं, साथ ही उनके अपने पर्सनल लॉ भी हैं. इस विविधता को ध्यान में रखते हुए यूसीसी हमारे देश के लिए सही हो सकता है, लेकिन इस पर ठीक से चर्चा होनी चाहिए.

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डीकेपी