महाराष्ट्र ने 2029 तक ड्रग्स को पूरी तरह खत्म करने के लिए नीति बनाई

Mumbai , 1 सितंबर . राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने के मकसद से एक अहम फैसले में Chief Minister देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली Maharashtra कैबिनेट ने Tuesday को 2029 तक राज्य से नशीले पदार्थों और सिंथेटिक ड्रग्स को पूरी तरह खत्म करने की एक व्यापक नीति को मंजूरी दी.

इस कदम के साथ Maharashtra India का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने केंद्र Government के राष्ट्रीय ‘नशा मुक्त India अभियान’ के तहत इतने बड़े पैमाने पर कई विभागों को मिलाकर एक साथ अभियान शुरू किया है. यह राज्य स्तर पर काम करने का एक नया मानक (बेंचमार्क) स्थापित करेगा.

नई मंजूर की गई पॉलिसी में ‘पूरे सरकारी तंत्र के मिलकर काम करने के तरीके’ को अपनाया गया है. इसमें जमीनी स्तर की ग्राम पंचायतों से लेकर जिला, डिवीजन और मंत्रालय स्तर तक सभी प्रशासनिक स्तरों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी कर दिया गया है. सख्त जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हर सरकारी विभाग ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ (एएनटीएफ) के साथ सीधे तालमेल बिठाने के लिए उप सचिव रैंक के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेगा.

एक बयान में कहा गया, “इस पॉलिसी के तहत राज्य में गैर-कानूनी ड्रग्स बनाने वाली फसलों की खेती, ड्रग्स का उत्पादन, ट्रांसपोर्टेशन, बिक्री और प्राकृतिक और सिंथेटिक ड्रग्स के सेवन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, इस बारे में बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा. इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी विभागों को ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ (एएनटीएफ) के साथ मिलकर काम करना होगा. इसके लिए, मंत्रालय स्तर पर तालमेल बिठाने के लिए हर विभाग से उप सचिव रैंक के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी.”

इस नीति को लागू करने के लिए अलग-अलग विभागों के लिए एक्शन प्लान तैयार किए गए हैं. इसमें अगले शैक्षणिक वर्ष (2027) से कक्षा 5 और उससे ऊपर की स्कूली शिक्षा में ड्रग्स के बारे में जागरूकता का एक पाठ शामिल किया जाएगा. ‘Chief Minister माझी शाला, सुंदर शाला’ फेज-3 में ड्रग-विरोधी जागरूकता के लिए अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे.

उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग को सभी शिक्षण संस्थानों के परिसर को ड्रग-मुक्त कैंपस बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी होगी. ‘Chief Minister समृद्धि पंचायत राज अभियान’ और ‘माझा गांव, आरोग्य संपन्न गांव अभियान’ में भी अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे. इसके अलावा, हर साल 26 जून को सबसे अच्छे ड्रग-मुक्त जिले के लिए पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी. इसमें 2 अक्टूबर से 30 अप्रैल तक हर जिले के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा.

पॉलिसी में ड्रग्स पर नियंत्रण के लिए चार मुख्य आधार तय किए गए हैं. इनमें प्रभावी ढंग से लागू करना, ड्रग्स की सप्लाई में भारी कमी लाना, ड्रग्स की मांग में प्रभावी कमी लाना, और लत, इलाज व पुनर्वास शामिल हैं. ड्रग कंट्रोल को असरदार ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी गृह, परिवहन, बंदरगाह, और कानून व न्याय विभागों की होगी. ड्रग्स की सप्लाई रोकने की जिम्मेदारी राजस्व, कृषि और वन विभागों को सौंपी गई है. वहीं, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग और उद्योग विभाग को आर्टिफिशियल तरीके से बनाई जाने वाली गैर-कानूनी ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी.

ड्रग्स की मांग को असरदार ढंग से कम करने की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च और तकनीकी शिक्षा, खेल विभाग, ग्रामीण विकास, जन स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कौशल और उद्यमिता, और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को दी गई है.

नशा छुड़ाने, इलाज और पुनर्वास की जिम्मेदारी सामाजिक न्याय और विशेष सहायता, जन स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग, शहरी विकास के साथ-साथ कौशल, रोजगार, उद्यमिता और इनोवेशन विभाग की होगी.

एससीएच/डीकेपी