
Mumbai , 5 अक्टूबर . Maharashtra के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) को गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स मामले में Supreme Court से राहत मिली है. Supreme Court ने 5 अक्टूबर 2026 को स्टेट ऑफ Maharashtra एंड ओआरएस. वी. एम/एस. गुरुनानक डेरी एंड स्वीट्स मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस निर्देश को रद्द कर दिया, जिसमें एफडीए को संबंधित प्रतिष्ठान को 5 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए कहा गया था.
Maharashtra एफडीए की ओर से 5 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट के अनुसार, मामला पुणे स्थित एक मिठाई और डेयरी उत्पाद प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्रवाई से जुड़ा है. एफडीए का कहना है कि कार्रवाई सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के प्रावधानों के तहत की गई थी.
प्रेस नोट के मुताबिक, 12 जून 2026 को फूड पॉइजनिंग की शिकायत मिलने के बाद एफडीए, पुणे के फूड सेफ्टी ऑफिसर्स ने संबंधित मिठाई और डेयरी प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया था.
निरीक्षण के दौरान एफडीए को स्वच्छता, रिकॉर्ड के रखरखाव, लेबलिंग और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता से संबंधित कमियां मिली थीं. इसके बाद विभाग ने प्रतिष्ठान का फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था.
एफडीए के अनुसार, निरीक्षण के दौरान मलाई पेड़ा का नमूना भी जांच के लिए लिया गया था. जांच में इस नमूने को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में फूड लाइसेंस निलंबित किया गया.
एफडीए की कार्रवाई के खिलाफ प्रतिष्ठान के मालिक ने 15 जून 2026 को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर के समक्ष वैधानिक अपील दाखिल की थी.
इसके बाद प्रतिष्ठान ने 9 जुलाई 2026 को कंप्लायंस रिपोर्ट जमा की. एफडीए के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के महज चार दिन बाद 13 जुलाई 2026 को प्रतिष्ठान का दोबारा निरीक्षण किया गया. इसके बाद प्रतिष्ठान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दायर की.
17 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रतिष्ठान के फूड लाइसेंस का निलंबन रद्द करते हुए एफडीए को 5 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया था. यह मुआवजा प्रतिष्ठान को हुए कारोबारी नुकसान के आधार पर देने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद Maharashtra Government ने इस आदेश को Supreme Court में चुनौती दी.
Maharashtra Government ने Supreme Court के सामने कहा कि एफडीए की कार्रवाई फूड पॉइजनिंग की शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई थी. निरीक्षण के दौरान मलाई पेड़ा का नमूना लिया गया और उसके असुरक्षित पाए जाने के बाद ही फूड लाइसेंस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में निलंबित किया गया.
राज्य Government ने यह भी कहा कि निरीक्षण में स्वच्छता, रिकॉर्ड, लेबलिंग और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता से संबंधित कमियां पाई गई थीं. Government का कहना था कि एफडीए ने पूरी प्रक्रिया के दौरान तत्परता दिखाई. प्रतिष्ठान की कंप्लायंस रिपोर्ट मिलने के सिर्फ चार दिन के भीतर उसका दोबारा निरीक्षण किया गया था.
राज्य Government ने Supreme Court को यह भी बताया कि प्रतिष्ठान की स्टेट्यूटरी अपील एफडीए कमिश्नर के पास लंबित थी और उस पर फैसला सुरक्षित रखा गया था. ऐसे में वैधानिक अपील प्रक्रिया में हस्तक्षेप किए बिना संबंधित प्राधिकरण के फैसले का इंतजार किया जा रहा था.
Government ने तर्क दिया कि एफडीए की कार्रवाई न तो दुर्भावनापूर्ण थी, न मनमानी और न ही जानबूझकर देरी करने के उद्देश्य से की गई थी. वैधानिक प्रक्रिया के दौरान सद्भावना में लगे समय को राज्य Government पर आर्थिक जुर्माना या मुआवजा लगाने का आधार नहीं बनाया जा सकता.
Maharashtra Government की ओर से रखी गई दलीलों पर विचार करते हुए Supreme Court ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा एफडीए को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने के निर्देश को रद्द कर दिया.
Maharashtra एफडीए ने प्रेस नोट में कहा कि यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत निरीक्षण में मिली कमियों के आधार पर और सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में की गई कार्रवाई कानून के अनुरूप और उचित है.
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एएमटी/
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