ममता बनर्जी ने सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की तत्काल रिहाई की मांग की

New Delhi, 20 अक्टूबर . पश्चिम बंगाल की पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की तुरंत रिहाई की मांग की है. उन्होंने जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में इन नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने को ‘राज्य-प्रायोजित आतंकवाद’ करार दिया है.

एक्स पर एक पोस्ट में बनर्जी ने आरोप लगाया कि अधिकारी युवाओं को निशाना बना रहे हैं और लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए उन्हें हिरासत में रख रहे हैं.

उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैं आशुतोष और सौरव की हिरासत बढ़ाने के पीछे के हताश इरादों को समझ सकती हूं. यह एक खतरनाक वायरस है, जिसका इस्तेमाल रोजाना लोकतंत्र पर हमला करने के लिए किया जा रहा है. ‘जेन जी’ को प्रताड़ित करना बंद करें. जो लोग आज सत्ता में हैं, वे कल सत्ता में नहीं रहेंगे. कोलकाता से लेकर दिल्ली और Mumbai तक, पूरे देश में अत्याचार अपने चरम पर पहुंच गए हैं. जब हमारे पूर्वज औपनिवेशिक शासकों के खिलाफ खड़े हुए थे, तब उन्हें भी अत्याचारों का सामना करना पड़ा था फिर भी उन्होंने पूरे संकल्प और बहादुरी के साथ लड़ाई लड़ी. मैं साफ तौर पर कह देना चाहती हूं, यह ‘स्टेट-स्पॉन्सर्ड’ (राज्य द्वारा प्रायोजित) आतंकवाद है. ये Police द्वारा प्रायोजित अत्याचार हैं. ये लंबे समय तक नहीं टिक सकते.”

ममता बनर्जी ने आगे कहा, “जब पक्के इरादे वाले लोग ‘India को बचाने’ और ‘लोकतंत्र को बचाने’ के मकसद के लिए मजबूती से डटे रहेंगे, तभी Government में बैठे इन अहंकारी और आंखें मूंदे नेताओं की आंखें खुलेंगी. तब तक जनता जीत चुकी होगी और लोकतंत्र के हत्यारों का खात्मा हो जाएगा. अगर आप लोकतंत्र में यकीन रखते हैं, तो आशुतोष और सौरव को तुरंत रिहा करें.”

ममता बनर्जी की यह टिप्पणी तब आई, जब जंतर-मंतर पर बिना अनुमति घुसने के मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) ने आशुतोष और सौरव की न्यायिक हिरासत को दो दिन और बढ़ा दिया.

Monday को पांच दिन की न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद सौरव दास और आशुतोष को मंदिर मार्ग Police स्टेशन में एसईएम के सामने पेश किया गया. दिल्ली Police ने उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जबकि सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने उन्हें और अधिक समय तक हिरासत में रखने की जरूरत पर सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि अभियोजन पक्ष कानून के आधार पर अपनी दलीलें पेश करने में विफल रहा है.

सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “हम अभी भी एसईएम कोर्ट में हैं और कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं. न्यायिक हिरासत बढ़ाने का कोई कारण नहीं है. आज भी सरकारी वकील की ओर से कानून के संबंध में कोई दलील नहीं दी गई. उनकी सभी दलीलें केवल अटकलें थीं. यह एसईएम कोर्ट का समय पूरी तरह से बर्बाद करना है.”

इस पूरी कार्यवाही को “समय की बर्बादी” बताते हुए रत्ना सिंह ने दोनों नेताओं को रिहा करने की मांग की.

बता दें कि सीजेपी के इन दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उन्हें जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जबकि जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है.

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ओपी/एएस