मध्य प्रदेश : मऊगंज में करंट लगने से हाथी की मौत, खुली बिजली लाइन से बढ़ी सुरक्षा की चिंता

Bhopal , 19 सितंबर . Madhya Pradesh के मऊगंज जिले के मलकपुर गांव के पास एक जंगली हाथी की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई. बताया जा रहा है कि उसकी सूंड एक खुली बिजली की तार में फंस गई थी. इस घटना ने मऊगंज-सीधी बॉर्डर के पास के जंगलों से गुजरने वाले हाथियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हाथी आदिवासी निवासी के घर के पास अमरूद के पेड़ से पत्ते खाने की कोशिश करते समय बिजली के तार के संपर्क में आ गया. जानकारी के अनुसार, बिजली का झटका लगने से जानवर की तुरंत मौत हो गई.

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जिसके बाद वन विभाग की एक टीम इलाके में पहुंची और जरूरी कार्रवाई शुरू की.

डीएफओ लोकेश नीरापुरे ने कहा कि हाथी की मौत के मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है और मलकपुर के पास पोस्टमार्टम किया जाएगा. वहीं, जिस जगह पर हाथी की मौत हुई, वह वन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है और मऊगंज जिले में वन क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है.

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने समाचार एजेंसी को बताया कि मृत हाथी एक मादा थी और उस जोड़े का हिस्सा थी, जो बांधवगढ़ इलाके से एक साथ घूम रहे थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना इलाके में हाथियों की आवाजाही की निगरानी में गंभीर चूक को दर्शाती है और जानवरों के आने-जाने वाले इलाके में खुले बिजली के तार की मौजूदगी के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की.

हाथियों का यह जोड़ा मऊगंज के हनुमाना इलाके में तुर्रा पहाड़ पार करने के बाद 14 सितंबर को सीधी के जंगलों में दाखिल हुआ था. वे Friday रात मलकपुर की ओर लौटने से पहले लगभग पांच दिनों तक मऊगंज-सीधी सीमा के पास के वन क्षेत्रों में रहे.

खबरों के मुताबिक, यह जोड़ा लगभग छह महीनों से मऊगंज, रीवा और सीधी के वन क्षेत्रों में घूम रहा था. हनुमाना इलाके में वे कई गांवों से भी गुजरे थे, जहां फसल और घरों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई थीं.

दुबे ने कहा कि इस घटना ने Madhya Pradesh में वन गलियारों से गुजरने वाले अन्य जंगली हाथियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं और वन्यजीव कार्यकर्ता हाथियों के आवासों के आसपास बिजली लाइनों के मामले में बेहतर निगरानी और एहतियाती उपायों की मांग कर रहे हैं.

डीके/डीकेपी