
छतरपुर, 15 अक्टूबर . Madhya Pradesh के छतरपुर में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में हाल ही में निकली “सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 3.0” और उससे जुड़े कथा सत्रों के दौरान युवाओं में शराब, नशे के खिलाफ और पारंपरिक मूल्यों से फिर से जुड़ने की एक मजबूत लहर देखने को मिली है.
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने “नशा मुक्त, महान भारत” का आह्वान करते हुए सामाजिक सुधार और नशा मुक्ति आंदोलन को नई गति दी है.
पांच दिवसीय रथ यात्रा 11 अक्टूबर को Madhya Pradesh के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से शुरू हुई और बुंदेलखंड के पांच जिलों – छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर और टीकमगढ़ में लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 15 अक्टूबर को संपन्न हुई. इसमें बड़ी संख्या में युवाओं सहित हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया.
हर प्रमुख पड़ाव पर धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों को शराब और अन्य नशीले पदार्थों को छोड़ने, जातिगत भेदभाव खत्म करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की शपथ दिलाई.
क्षेत्र में नशे की गंभीर समस्या पर प्रकाश डालते हुए आध्यात्मिक नेता ने कहा कि एक विशेष नशा मुक्ति अभियान यात्रा का मुख्य हिस्सा था. उन्होंने कहा, “बुंदेलखंड नशे से जूझ रहा है. विशेष कदम उठाए गए और लोगों ने शपथ ली. हमें विश्वास है कि यह यात्रा बड़ा बदलाव लाएगी.”
बांदा जैसे क्षेत्रों में धीरेंद्र शास्त्री ने उन परिवारों से मुलाकात की जिन्होंने जहरीली शराब के कारण अपने प्रियजनों को खो दिया और इस खतरे के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की अपील की.
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जब युवा जागेगा, तब India जागेगा; नशा मुक्त India का सपना साकार होगा.”
उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि नशा व्यक्ति और राष्ट्र दोनों को कमजोर करता है और युवाओं से सनातन सिद्धांतों पर आधारित पारंपरिक मूल्यों, अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण जीवन को अपनाने का आग्रह किया.
धीरेंद्र शास्त्री ने Madhya Pradesh Government से बिहार और Gujarat के सफल उदाहरणों का हवाला देते हुए राज्य में शराब की दुकानों पर पूर्ण प्रतिबंध पर विचार करने का भी आह्वान किया.
उन्होंने घोषणा की कि उनकी अगली यात्रा विशेष रूप से नशा मुक्ति और नशे के खिलाफ जागरूकता पर केंद्रित होगी.
रथ यात्रा और कथा सत्रों का असर शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहने का सार्वजनिक रूप से संकल्प लेने वाले युवा श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या में साफ दिखाई दे रहा है. आयोजक और स्थानीय समर्थक इस आंदोलन को एक स्वस्थ, मूल्य-आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं.
“नशा मुक्त, महान भारत” के अपने आह्वान के माध्यम से धीरेंद्र शास्त्री नई पीढ़ी को हानिकारक आदतों को छोड़ने और India की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक जड़ों से फिर से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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डीएससी
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