
Mumbai , 13 सितंबर . विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ओर से इस महीने अब तक (1-12 सितंबर तक) 14,474 करोड़ रुपए इक्विटी मार्केट से निकाले गए हैं. इससे पहले जुलाई और अगस्त में सकारात्मक इनफ्लो दर्ज किया गया था.
वहीं, प्राइमरी मार्केट (आईपीओ) में एफपीआई निवेश अब तक सकारात्मक 1,336 करोड़ रुपए पर बना हुआ है, जिससे इस साल प्राइमरी मार्केट में कुल एफपीआई निवेश बढ़कर 47,183 करोड़ रुपए हो गया है.
इस बीच, पूरे हफ्ते भारतीय इक्विटी बाजार पर काफी दबाव बना रहा और निफ्टी 50 में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई.
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और महंगाई, ग्लोबल ब्याज दरों और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इस कारण बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई और हफ्ते के दौरान प्रमुख सेक्टर गिरावट के साथ बंद हुए.
मार्केट के जानकारों का कहना है कि घरेलू इक्विटी के लिए कच्चे तेल की कीमतें एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं.
विदेशी संस्थागत निवेशकों के सतर्क बने रहे और उनकी लगातार बिकवाली घरेलू इक्विटी के लिए एक बड़ी बाधा बन रही है.
इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले हफ्ते 6,419.46 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी बिकवाली के असर को कम करने और घरेलू इक्विटी मार्केट में और गिरावट को रोकने में मदद मिली.
आगे चलकर, एफपीआई का निवेश ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर से काफी हद तक प्रभावित होगा.
जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ती महंगाई का मतलब है कि मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होगी, जिससे बॉन्ड यील्ड और बढ़ेगी.
आने वाले हफ्ते में ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पॉलिटिकल जोखिमों के कारण भारतीय इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है. कच्चे तेल की कीमतें, मध्य पूर्व में घटनाक्रम और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदें मार्केट के मूड को तय करने वाले मुख्य कारक होंगे.
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एबीएस
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