
इंफाल, 31 अगस्त . मणिपुर हाई कोर्ट ने Monday को केंद्र और राज्य Governmentों से मणिपुर में India की जनगणना 2027 के लिए घर-घर सूचीकरण प्रक्रिया को स्थगित करने का आश्वासन प्राप्त किया, जो 1 सितंबर से शुरू होने वाली थी.
मुख्य न्यायाधीश एम. सुंदर और न्यायमूर्ति ए. गुनेश्वर शर्मा की खंडपीठ कांगलेइपाक छात्र संघ (केएसए) और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सामाजिक उन्नति (आईपीएसए) द्वारा दायर जनहित याचिका और जनगणना प्रक्रिया से संबंधित एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
सुनवाई के दौरान, केंद्र Government की ओर से पेश हुए India के उप सॉलिसिटर जनरल ने रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के निर्देशों पर बताया कि चर्चा के बाद मणिपुर में जनगणना 2027 के लिए घर-घर सूचीकरण कार्य को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है. केंद्र Government 7 जनवरी, 2026 की अपनी पिछली अधिसूचना में उचित संशोधन करते हुए एक अधिसूचना जारी करेगी. न्यायालय ने इस निवेदन को रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के वचन के रूप में दर्ज किया.
केंद्र Government के इस निर्णय के बाद मणिपुर के एडवोकेट जनरल ने बताया कि राज्य Government 1 सितंबर से घर-घर सूचीकरण कार्य शुरू नहीं करेगी. 22 मार्च, 2026 की राज्य Government की अधिसूचना केंद्र Government द्वारा राज्य में कार्य को औपचारिक रूप से स्थगित करने की अधिसूचना जारी होने तक स्थगित रखी जाएगी. न्यायालय ने इस निवेदन को भी राज्य Government के वचन के रूप में दर्ज किया.
न्यायालय ने कहा कि राज्य Government की अधिसूचना के अनुसार 1 सितंबर से शुरू होने वाली मकानों की सूची बनाने की प्रक्रिया 12 अक्टूबर, 2026 को अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी. इस बीच, संबंधित पक्षों को अपने पक्ष में दलीलें पूरी करने का निर्देश भी दिया गया है.
मणिपुर में मौजूदा स्थिति और जनगणना प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों को देखते हुए जनगणना को स्थगित करने की मांगों के बीच यह कार्यवाही शुरू हुई. याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के लागू होने और प्रवर्तन से संबंधित मणिपुर विधानसभा के 5 अगस्त, 2022 को पारित और 1 मार्च, 2024 को दोहराए गए प्रस्तावों की ओर भी न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया था.
न्यायालय ने पहले प्रतिवादियों को याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अपना स्पष्ट और विशिष्ट रुख रखने का निर्देश दिया था. केंद्र Government ने बाद में संकेत दिया कि स्थगन संबंधी निर्णय राज्य स्तर पर लिया जा सकता है, जबकि राज्य Government ने अपना रुख स्पष्ट करने के लिए समय मांगा था. इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे हाई कोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष होगी.
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एमएस/
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