‘मंदिर निर्माण के साथ शहर का भी हुआ विकास’, अयोध्या में दीपोत्सव की भव्यता पर इकबाल अंसारी

अयोध्या, 5 नवंबर . दीपावली और अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव समारोह को लेकर इकबाल अंसारी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के आगमन की खुशी में दीपावली मनाई जाती है और इस दौरान पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठता है. अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ-साथ विकास के कई काम भी हुए हैं. उन्होंने शहर में कुंड, पार्क और अन्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अयोध्या में किसी चीज की कमी नहीं है. इस दौरान उन्होंने कई अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय रखी.

दीपावली के महत्व पर बात करते हुए इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या महापुरुषों, देवी-देवताओं और भगवान राम की नगरी है. यहां दीपावली भगवान राम के आने की खुशी में मनाई जाती है. इस दौरान ऐसा महसूस होता है, जैसे भगवान राम स्वयं दीपावली के दिन अयोध्या आ रहे हों. इसी भावना के साथ लोग अपने घरों में दीप जलाते हैं और पूरे शहर को सजाया जाता है. कुंड, पार्क और मंदिरों सहित अयोध्या का हर हिस्सा इस उत्सव में शामिल होता है.

उन्होंने कहा कि दीपावली का त्योहार पूरे देश और दुनिया में खुशी के साथ मनाया जाता है, लेकिन अयोध्या में इसका विशेष महत्व है. इसकी वजह भगवान राम का अयोध्या में विराजमान होना और उनके आगमन से जुड़ी परंपरा है. जिस तरह भगवान राम के आने पर अयोध्या सजी थी, आज भी दीपावली के दिन वैसा ही माहौल दिखाई देता है. लोगों को लगता है कि भगवान राम स्वयं आ रहे हैं और वे दीप जलाकर उनका स्वागत करेंगे.

अयोध्या में मंदिर निर्माण और विकास कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर बना है तो शहर का विकास भी हुआ है. कुंड और पार्क जैसी सुविधाओं से अयोध्या सुसज्जित हुई है. उन्होंने इस भव्य दीपावली आयोजन को Chief Minister योगी आदित्यनाथ की देन बताया और कहा कि मंदिर निर्माण के बाद यहां दीपावली बड़े स्तर पर मनाई जाती है.

अगले साल होने वाले चुनाव और Political आरोप-प्रत्यारोप को लेकर पूछे गए सवाल पर अंसारी ने कहा कि अयोध्या में अलग-अलग Political दलों के लोग हैं और सभी अपनी-अपनी बात रखते रहते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि Political बयानबाजी से दीपावली के उत्सव पर कोई असर नहीं पड़ता. अयोध्या में पिछले दस वर्षों से दीपावली बड़े अच्छे तरीके से मनाई जा रही है. इससे पहले भी भगवान राम के आगमन की खुशी में यह त्योहार मनाया जाता था.

वहीं, हुमायूं या बाबर के नाम पर मस्जिद बनाए जाने का विरोध करने वाले सुवेंदु अधिकारी के बयान पर अंसारी ने कहा कि मस्जिद की अपनी अलग पहचान होती है और उसे किसी व्यक्ति के नाम से जोड़ना जरूरी नहीं है. मस्जिद अक्सर अपने मोहल्ले के नाम से पहचानी जाती है. मस्जिद की पहचान उसकी बनावट और मीनारों से होती है, जबकि मंदिर की अपनी पहचान और शिवालय होते हैं.

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