
लंदन, 17 अक्टूबर . India और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच आयोजित द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘कोंकण-26’ ब्रिटेन के प्लायमाउथ के तट पर संपन्न हो गया. भारतीय नौसेना ने Saturday को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं को विभिन्न पेशेवर और परिचालन क्षेत्रों में साथ काम करने का अवसर मिला.
यह अभ्यास 8 से 15 अक्टूबर तक आयोजित किया गया. इसमें भारतीय नौसेना की ओर से स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल ने हिस्सा लिया, जबकि ब्रिटेन की रॉयल नेवी की ओर से ड्यूक श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत एचएमएस सदरलैंड शामिल हुआ. इस अभ्यास का संचालन रॉयल नेवी के फ्लीट ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स एंड ट्रेनिंग (एफओएसटी) ने किया.
भारतीय नौसेना के अनुसार, 12 से 15 अक्टूबर तक चले चार दिवसीय समुद्री चरण में उन्नत नौवहन युद्धाभ्यास, संयुक्त सामरिक अभ्यास, संचार प्रक्रियाओं, असममित सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी युद्ध और हथियारों के परीक्षण जैसी गतिविधियां शामिल रहीं. ये गतिविधियां कई तरह के समुद्री खतरों वाले परिचालन वातावरण में आयोजित की गईं.
नौसेना ने कहा कि इन अभ्यासों से दोनों देशों के नौसैनिक पोतों के बीच आपसी तालमेल और संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता में सुधार हुआ.
नौसेना के बयान के मुताबिक, पेशेवर अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के माध्यम से ‘कोंकण-26’ ने जटिल समुद्री परिस्थितियों में भारतीय नौसेना और रॉयल नेवी की संयुक्त परिचालन क्षमता को मजबूत किया. इससे India और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को भी आगे बढ़ाने में मदद मिली.
रक्षा मंत्रालय ने इससे पहले बताया था कि भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल 11 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्लायमाउथ पहुंचा था, जहां उसे इस अभ्यास में हिस्सा लेना था.
मंत्रालय ने कहा था कि भारत-ब्रिटेन का वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘कोंकण’ दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी का प्रमाण है. पिछले दो दशकों में इस अभ्यास का दायरा और जटिलता बढ़ी है, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल और आपसी समझ बेहतर हुई है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अपनी शुरुआत के बाद से ‘कोंकण’ India और ब्रिटेन के बीच समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार बन गया है. यह समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दोनों नौसेनाओं की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.
मंत्रालय ने कहा कि यह अभ्यास सुरक्षित, खुले और स्वतंत्र समुद्र सुनिश्चित करने के साझा संकल्प की पुष्टि करता है. साथ ही, यह भारत-ब्रिटेन विजन 2035 में उल्लिखित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को भी प्रदर्शित करता है.
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डीएससी
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