
New Delhi, 12 अक्टूबर . India के वित्तीय सेवा क्षेत्र में 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 7.3 अरब डॉलर के 67 सौदे दर्ज किए गए. यह जानकारी Monday को जारी एक रिपोर्ट में दी गई.
ग्रांट थॉर्नटन India की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सौदों का कुल मूल्य तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 129 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सौदों की संख्या मामूली रूप से 65 से बढ़कर 67 हो गई.
सौदों के मूल्य में इस तेज वृद्धि के पीछे बड़े मूल्य वाले विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) सौदे और सार्वजनिक बाजार में पूंजी जुटाने की गतिविधियों की अहम भूमिका रही. इनमें दो बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी शामिल थे.
आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) को छोड़कर विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (पीई/ ) गतिविधियों के तहत 3 अरब डॉलर के 58 सौदे हुए.
2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 54 प्रतिशत बढ़ा. साथ ही, सार्वजनिक बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की गतिविधियों में मजबूती आई, वहीं पीई/ निवेश में सौदों की संख्या और मूल्य, दोनों में गिरावट दर्ज की गई.
फिनटेक, बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का संयुक्त रूप से कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत योगदान रहा. यह प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय प्लेटफॉर्म और ऋण कारोबार में निवेशकों के लगातार बने हुए विश्वास को दर्शाता है.
ग्रांट थॉर्नटन India में फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी के पार्टनर और एनबीएफसी इंडस्ट्री लीडर विवेक अय्यर ने कहा, “जैसे-जैसे पूंजी निवेश के मामले में चयनात्मक रुख बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्रोथ को टिकाऊ रिटर्न में बदलने की क्षमता यह तय करेगी कि किन वित्तीय कंपनियों को निवेश मिलेगा.”
उन्होंने कहा कि अधिक लागत वाले माहौल में मजबूत फंडिंग मॉडल, बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और नियामकीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितना कि कारोबार का विस्तार करने का अवसर.
उन्होंने आगे कहा, “India के वित्तीय इकोसिस्टम में विकास की अभी भी काफी संभावनाएं हैं, लेकिन अगले चरण में उन कारोबारों को फायदा होगा जो केवल तेजी से नहीं, बल्कि टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ सकते हैं.”
2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए गतिविधियों के तहत 2.3 अरब डॉलर के 23 सौदे दर्ज किए गए. हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 4 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन एक बड़े सौदे के कारण कुल मूल्य में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
घरेलू सौदों की कुल संख्या में 78 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, लेकिन सौदों के कुल मूल्य में उनका योगदान केवल 9 प्रतिशत था. वहीं, विदेश से India में किए गए तीन सौदों का एमएंडए के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत योगदान रहा.
विदेशों में भारतीय कंपनियों की ओर से किए गए सौदों की गतिविधियां भी धीमी रहीं. दूसरी तिमाही में ऐसे सात सौदे हुए थे, जबकि तीसरी तिमाही में इनकी संख्या घटकर दो रह गई.
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एबीएस
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