
New Delhi, 11 अक्टूबर . भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने Sunday को New Delhi स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया और कहा कि राहुल गांधी तमिल भाषा और संस्कृति के मुद्दों पर आरोप लगाकर उत्तर-दक्षिण के बीच विभाजन पैदा कर रहे हैं.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में तमिलनाडु में मेट्रो, रेलवे, राजमार्ग और बंदरगाहों की परियोजनाएं शुरू हुईं तथा तमिल विरासत को सम्मान मिला. उन्होंने विदेशी एजेंसियों की फंडिंग, आपातकाल से तुलना और चुनावी आरोपों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस से सबूत मांगे. डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी के आरोपों का उद्देश्य विकास के मुद्दों से ध्यान हटाकर Political विभाजन फैलाना है.
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि Prime Minister मोदी के प्रति ईर्ष्या और कुंठा से ग्रस्त होकर तथा India को अराजकता और विभाजन की आग में झोंकने के लिए जगह-जगह विचरण कर रहे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर चेन्नई में हमारी Government और Prime Minister मोदी पर निराधार और अनर्गल आरोप लगाने का प्रयास किया है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि तमिल भाषा पर आक्रमण किया जा रहा है और नीट इसका उदाहरण है, जबकि यह आरोप पूरी तरह गलत है. वास्तविकता यह है कि Prime Minister मोदी के कार्यकाल में तमिल भाषा को सम्मान देने और उसकी विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए भी प्रयास किए गए हैं. आज चेन्नई में लगभग 13,000 करोड़ रुपए की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया. इनमें चेन्नई मेट्रो के लिए 4,900 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 3,700 करोड़ रुपए और कराइकल–पेरलम रेल लाइन के लिए 750 करोड़ रुपए की परियोजनाएं शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, चेन्नई के वी.ओ. चिदंबरनार और कामराज नगर बंदरगाहों सहित तीन बंदरगाहों के अपग्रेडेशन का कार्य भी किया गया है.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि Prime Minister मोदी ने विभिन्न अवसरों पर तमिल भाषा, तमिल संस्कृति और तमिल प्रतीकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया है. Prime Minister ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान तमिल संस्कृति और भाषा के धार्मिक एवं साहित्यिक पहलुओं का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिससे वैश्विक मंच पर तमिल भाषा और साहित्य की प्रतिष्ठा बढ़ी. तमिल संस्कृति के प्रतीक पवित्र सेंगोल को नए संसद भवन में स्थापित किया गया. यह तमिल संस्कृति की शाश्वत विरासत का प्रतीक है, लेकिन कांग्रेस ने मई 2023 में इसका विरोध किया. इसके अतिरिक्त, चेन्नई में शास्त्रीय तमिल संस्थान की स्थापना की गई. 16 मई 2026 को हेग से चोलकालीन ताम्रपत्र वापस लाए गए और सितंबर 2022 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में सुब्रमण्यम भारती पीठ की स्थापना की गई.
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रयास विभाजन पैदा करना है, जबकि हमारा उद्देश्य भारतीय संस्कृति की वास्तविक एकता को मजबूत करना है. इसी उद्देश्य से Prime Minister मोदी ने काशी तमिल संगमम और सौराष्ट्र तमिल संगमम जैसी अनूठी पहल शुरू कीं, जो राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. पिछले महीने Prime Minister मोदी ने ब्रिक्स समिट के दौरान मुलाकात के वक्त रूसी President व्लादिमीर पुतिन को तमिल साहित्य की अत्यंत प्रतिष्ठित रचना तिरुक्कुरल भेंट की. India Government ने दुनिया भर में तिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की पहल की है, जिसका पहला केंद्र सिंगापुर में स्थापित किया गया है. कांग्रेस बताए कि वर्ष 1967 से तमिलनाडु की सत्ता से बाहर रहने के बाद भी उसने तमिल भाषा और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए ऐसे कितने प्रयास किए? Prime Minister मोदी ने तमिल संस्कृति और इतिहास को सम्मान देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. इनमें तमिल साहित्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करना तथा राजाराजा चोल और राजेंद्र चोल की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा करना शामिल है. यह Prime Minister मोदी की निष्पक्षता को दर्शाता है.
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि जब केंद्र Government ने रक्षा उत्पादन और देश की रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपनी सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत पहल की, तब दो रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने का निर्णय लिया गया. इनमें से एक उत्तर India में उत्तर प्रदेश और दूसरा दक्षिण India में तमिलनाडु में स्थापित किया गया. जब वर्ष 2015-16 में यह निर्णय लिया गया, तब उत्तर प्रदेश में भाजपा की Government नहीं थी. इसके अलावा, दूसरा रक्षा औद्योगिक गलियारा तमिलनाडु को दिया गया, जहां न तो भाजपा की Government थी और न ही विपक्ष में थी. यह Prime Minister मोदी की निष्पक्ष और सकारात्मक सोच को दर्शाता है, जो तमिलनाडु के विनिर्माण उद्योग को बढ़ावा देने और उसकी क्षमताओं को सशक्त बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है.
उन्होंने कहा कि Prime Minister मोदी चीन के President को महाबलीपुरम लेकर गए थे. राहुल गांधी बताएं कि क्या उन्हें महाबलीपुरम और तमिल संस्कृति के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी है? महाबलीपुरम का संबंध पल्लव वंश से रहा है. वहीं से एक पल्लव किंग बोधिधर्म थे, जिन्हें चीन में दामो के नाम से जाना जाता है और वहां बौद्ध परंपरा में एक पितामह के रूप में माने जाते हैं. India और चीन के बीच इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध को कांग्रेस ने कभी पूरी तरह स्थापित करने का प्रयास नहीं किया. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषणों को देखा जाए तो यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि भारतीय संसद में बजट भाषणों के दौरान जिस भारतीय शास्त्रीय ग्रंथ का सबसे अधिक उल्लेख किया गया है, वह ग्रंथ तिरुक्कुरल है.
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी लगातार समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं. पहले उन्होंने पुणे में महिलाओं और पुरुषों के बीच टकराव पैदा करने की कोशिश की और अब उत्तर India तथा दक्षिण India के बीच विवाद खड़ा करना चाहते हैं. लेकिन लड़ाई भड़काने की उनकी ये आकांक्षाएं पूरी नहीं होंगी. काशी तमिल संगमम के पिछले आयोजन में आदरणीय Prime Minister श्री Narendra Modi जी ने लगभग पांच मिनट तक हिंदी में संबोधन दिया था, जिसका एआई के माध्यम से तमिल में तत्काल अनुवाद किया गया. अब भारतीय संसद में भी एआई की मदद से 22 भारतीय भाषाओं में भाषणों का लाइव अनुवाद उपलब्ध है. पहले अपनी भाषा में बोलने के लिए एक दिन पहले सूचना देनी पड़ती थी, ताकि उस भाषा में अनुवाद की व्यवस्था की जा सके, लेकिन अब ऐसी बाध्यता नहीं है.
उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में तकनीक इतनी विकसित हो जाएगी कि किसी भी भाषा के मौखिक भाषण और लिखित सामग्री का तेजी से और उच्च गुणवत्ता के साथ अनुवाद संभव होगा. ऐसे में भाषा के नाम पर लोगों को बांटने की राजनीति का आधार ही समाप्त हो जाएगा. राहुल गांधी ने पिछली बार पुणे में ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ का नारा दिया था. आज नवरात्रि का प्रथम दिन है और भारतीय संस्कृति और विशेषकर हिंदू संस्कृति में मातृशक्ति की आराधना का विशेष महत्व है. Prime Minister मोदी ने चंद्रमा के अछूते दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान की सफल लैंडिंग के बाद उस स्थान का नाम ‘शिव शक्ति पॉइंट’ रखा था. भारतीय परंपरा में देवी की आराधना को सर्वोच्च स्थान दिया गया है. ‘देवी पूज पद कमल तुम्हारे, सुर नर मुनि सब होत सुखारे.’ अर्थात् देवी के चरण कमलों की पूजा करके मनुष्य, मुनि और देवता सभी सुख प्राप्त करते हैं. जो लोग ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ का नारा देते हैं, वे अन्य धार्मिक परंपराओं में महिलाओं की स्थिति पर भी इसी तरह सवाल उठाने का साहस क्यों नहीं दिखाते? पुणे से चेन्नई तक विभाजन पैदा करने की राजनीति की जा रही है, लेकिन यह वास्तविकता के धरातल पर टिक नहीं पा रही है.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि देश में दुष्प्रचार के माध्यम से विभाजन और अराजकता का माहौल बनाने का अभियान चलाया जा रहा है, क्योंकि India इस समय वैश्विक स्तर पर एक बहुत प्रभावशाली स्थिति में उभरकर आगे आ रहा है. यह स्वाभाविक है कि कई शक्तियों को India का यह उत्थान अच्छा नहीं लग रहा होगा. कुछ लोग एक किलोमीटर के दायरे में बैरिकेडिंग होने पर ही आपातकाल जैसी स्थिति बताने लगते हैं. आज की पीढ़ी ही नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ी ने भी आपातकाल की वास्तविकता को केवल सुना है, प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है. इसलिए मैं केवल दो बातें याद दिलाना चाहता हूं कि वास्तव में आपातकाल क्या था. आज कोई भी व्यक्ति Prime Minister Narendra Modi के बारे में कुछ भी बोल देता है और उन पर निराधार एवं अनर्गल आरोप लगाता है, लेकिन आपातकाल के दौरान डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स (डीआईआर) के तहत ऐसी स्थिति थी कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थल पर केवल इतना कह देता था कि इंदिरा गांधी की Government को हटाना है, तो उसे जेल में डाल दिया जाता था. उसे जमानत के लिए आवेदन करने और अदालत जाने तक का अधिकार नहीं था.
उन्होंने कहा कि अदालत में यह सवाल भी उठाया गया था कि यदि Police किसी को गोली मारती रहे, तो क्या उसे रोकने का कोई उपाय नहीं होगा? उस दौर में मानवाधिकारों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था तथा विपक्ष के नेताओं को जेल में डाल दिया गया था. आपातकाल के दौरान संसद का कार्यकाल पांच वर्ष से बढ़ाकर छह वर्ष कर दिया गया था. सामान्य परिस्थितियों और आपातकाल जैसी गंभीर स्थिति की तुलना करना, राई का पहाड़ से तुलना करने के समान है और लोकतंत्र का मजाक उड़ाने के समान है. जो लोग लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलकर अराजकता फैलाना चाहते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि आपातकाल की तुलना आज की परिस्थितियों से करना उन लाखों लोगों के संघर्ष और कष्टों का अपमान है, जिन्होंने उस दौरान जेल में समय बिताया और यातनाएं सहीं.
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि आज ये सब क्यों हो रहा है, इसका कारण समझने की आवश्यकता है. मोदी Government के सत्ता में आने के बाद से India दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है और लगातार 7-8 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रहा है. आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में हम सबसे आगे चल रहे हैं और डिजिटल लेन-देन में दुनिया के नंबर वन देश हैं. India में ऐसी कंपनियां हैं, जिनके पास मौजूद डेटा, एटीएंडटी, वेरिजॉन और टी-मोबाइल के कुल डेटा से भी अधिक है. दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी India में निवेश कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल हैंडसेट कंपनियों में से एक सैमसंग की सबसे बड़ी फैक्ट्री India में है. सबसे हाई-एंड फोन माने जाने वाले आईफोन की चीन के बाहर सबसे बड़ी फैक्ट्री India में है. चिप बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन की भी चीन के बाहर सबसे बड़ी फैक्ट्री India में है. गूगल विशाखापत्तनम में 19.5 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है और अमेजन अमेरिका के बाहर अपना सबसे बड़ा कार्यालय हैदराबाद में खोलने जा रहा है. अटल बिहारी वाजपेयी Government के समय में माइक्रोसॉफ्ट ने अपना पहला विदेशी कार्यालय India में खोला था. हम मंगल तक पहुंचने वाले दुनिया के चौथे देश बने हैं. वह भी पहले ही प्रयास में और सबसे कम लागत में. कुछ लोगों को ये सारी बातें अच्छी नहीं लग रही हैं. इसके लिए विदेशी शक्तियां भी सक्रिय हैं और देश के अंदर भी वही शक्तियां सक्रिय हैं.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज राहुल गांधी स्टारलिंक का स्वागत क्यों कर रहे हैं? मात्र एक साल पहले कांग्रेस के प्रबुद्ध और विद्वान चेहरे जयराम रमेश अपनी पूरी विद्वता के साथ स्टारलिंक को अनुमति देने पर सवाल उठा रहे थे. आज राहुल गांधी उसी के साथ खड़े हो गए हैं. कांग्रेस हमेशा विदेशी शक्तियों और विदेशी कंपनियों के साथ खड़ी दिखाई देती है. 1984 की Bhopal गैस त्रासदी में यूनियन कार्बाइड के साथ खड़ी कांग्रेस, बोफोर्स के साथ खड़ी कांग्रेस, हॉबज के साथ खड़ी कांग्रेस, अगस्ता वेस्टलैंड के साथ खड़ी कांग्रेस और हिंडनबर्ग के साथ खड़ी कांग्रेस.
उन्होंने कहा कि जब भी कोई विदेशी संस्थान India के खिलाफ कुछ लिखता है, चाहे वह वाशिंगटन पोस्ट हो, न्यूयॉर्क टाइम्स हो या बीबीसी, कांग्रेस उनके साथ खड़ी दिखाई देती है. 2जी स्पेक्ट्रम मामले में भी बड़ी संख्या में विदेशी कंपनियों को लाइसेंस दिए गए थे. यदि मोदी Government नहीं आई होती तो डिजिटल क्षेत्र में आज India की जो नंबर वन स्थिति है, उसमें भारतीय कंपनियों के बजाय विदेशी कंपनियां दिखाई दे रही होतीं. इसी तरह यदि अटल बिहारी वाजपेयी की Government नहीं आई होती तो टेलीकॉम क्षेत्र में आज जिन भारतीय कंपनियों को हम देख रहे हैं, उनकी जगह विदेशी कंपनियां दिखाई दे रही होतीं. विदेशी कंपनियों के प्रति कांग्रेस की दिली आरजू अब सामने आ गई है.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका में एक जीबी डेटा की कीमत 5.5 से 6.5 डॉलर प्रति माह है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 550 से 600 रुपए होती है, जबकि India में यही कीमत मात्र 15 से 17 रुपए है. अमेरिका और India में डेटा की कीमतों का अंतर कोई भी जाकर जांच सकता है. राहुल गांधी किसकी बैटिंग कर रहे हैं? यह अब देश को समझ में नहीं आ रहा है. देश को अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर देखना चाहिए. अमेरिकी एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) ने India में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए करोड़ों डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए. 9 फरवरी 2025 को अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया था कि यूएसएआईडी को India में मतदान प्रतिशत बढ़ाने से क्या मतलब है. India में मतदाता बनने के लिए पैसे की कोई जरूरत नहीं है.
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष हो गई है, तो वह फॉर्म भरकर मतदाता बन सकता है. यदि उस व्यक्ति के माता-पिता, दादा-दादी या परिवार का कोई भी सदस्य किसी मतदाता सूची में शामिल नहीं है, तो निर्धारित मानक दस्तावेज प्रस्तुत करके मतदाता बन सकता है. इसमें पैसे की कोई भूमिका नहीं है. फिर मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए क्यों खर्च किए जा रहे थे? इसी कारण अमेरिकी President ने कहा कि उन्होंने उस फंडिंग को रोक दिया है. वर्ष 2024 तक India में मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए आ रहे थे. वर्ष 2025 के बाद जब संदिग्ध मतदाताओं के शुद्धीकरण की प्रक्रिया एसआईआर शुरू हुई, तो उसके बाद किसके हृदय में घबराहट, बौखलाहट और खिसियाहट दिखाई देने लगी? इस पहलू को भी देखने और समझने से पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकती है.
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि एक तरफ India की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है तो दूसरी तरफ India की आंतरिक व्यवस्था में अव्यवस्था उत्पन्न करने का षड्यंत्र देश के भीतर और बाहर, दोनों तरफ से चल रहा है. जैसा कि पिछले ढाई-तीन वर्षों में India की संसद के प्रत्येक सत्र शुरू होने से पहले कहीं विदेश से एक ताली बजती थी और उसके बाद इस देश की संसद में बवाल शुरू हो जाता था. इसलिए भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से तीन सवाल करना चाहते हैं.
पहला सवाल – India के अंदर तनाव और विभाजकता उत्पन्न करने के लिए तमिलनाडु, तमिल संस्कृति और तमिल भाषा को लेकर आपने सरासर झूठ क्यों बोला? किसके इशारे पर बोला?
दूसरा सवाल – क्या आपातकाल जैसी दुर्दांत घटना, जिसमें जेल जाने के बाद बेल मिलने का प्रावधान नहीं था और अखबारों में क्या छपेगा, यह Government तय करती थी, उसकी तुलना एक किलोमीटर की बैरिकेडिंग से करना लोकतंत्र का मजाक उड़ाने और आपातकाल के सेनानियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा नहीं है?
तीसरा सवाल – आखिर क्या कारण है कि कुछ विदेशी एजेंसियां India में वोटर टर्न आउट बढ़ाने में लगी थीं और उसमें पैसा क्यों खर्च किया जा रहा था? और जैसे ही उन गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की गई, तो आपको समस्या क्यों होने लगी?
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हम कांग्रेस पार्टी से विनम्रता और चुनौती के साथ पूछना चाहते हैं कि उपचुनाव परिणाम आ चुके हैं. कांग्रेस पार्टी बताए कि उसके बूथ लेवल एजेंटों ने एक-एक मतदाता सूची की जांच की थी या नहीं? यदि जांच की थी, तो उस पर हस्ताक्षर किए थे या नहीं? यदि हस्ताक्षर नहीं किए थे, तो कोई आपत्ति दर्ज की थी या नहीं? चुनाव के दौरान कांग्रेस के पोलिंग एजेंट ने एक-एक चीज की जांच की थी और उसके बाद प्रमाणित करके हस्ताक्षर किए थे या नहीं? पोलिंग एजेंट ने cctv की पूरी निगरानी के दौरान एक-एक चीज को मॉनिटर किया और स्वीकार किया था या नहीं? कांग्रेस बहुत हल्ला मचाती है कि 45 दिन की समय-सीमा क्यों है और cctv में सबूत मांगने की बात करते हैं. अभी 44 दिन बाकी हैं. हम कांग्रेस से पूछना चाहते हैं कि 44 दिन बाकी हैं, cctv मांगोगे या नहीं? लेकिन कांग्रेस मांगेगी क्या? कांग्रेस का डब्बा दोनों तरफ से बबज चुका है. सिलचर नगर निगम में तो डब्बे में भी चुनाव हो गया, लेकिन बैलेट बॉक्स में भी कांग्रेस का डब्बा बज गया. 42 में से 34 सीटें भारतीय जनता पार्टी और एनडीए को मिल गईं.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि इसीलिए कहा जाता है कि झूठ के पांव नहीं होते. कांग्रेस यह बताकर जाए कि यदि नगर निगम के उपचुनाव में उसके सभी बीएलए, इलेक्शन एजेंट, पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट मौजूद थे और cctv फुटेज सहित सभी व्यवस्थाएं ठीक थीं, तो फिर हल्ला किस बात का है? क्या सिर्फ हल्ला मचाना है, क्योंकि लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है? राहुल गांधी तो यह भी कहते थे कि उनके फोन में पेगासस है. दूसरी तरफ यह कहा जा रहा है कि राहुल गांधी क्या चाल चल रहे हैं, इसकी Government को भनक तक नहीं लग पाती. वे कब Prime Minister के आवास के सामने पहुंच जाते हैं और कब आकाशवाणी के अंदर घुस जाते हैं, Government को पता ही नहीं चलता. अगर राहुल गांधी की बात में दम होता, तो Government को सब कुछ पता होता.
उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि झूठ बोलते रहना और झूठ फैलाते रहना ही उनका काम है. राहुल गांधी तो कहते थे कि ईवीएम हैक है और बटन कोई भी दबाओ, वोट भाजपा को ही जाता है. अब देश का कोई भी सामान्य बुद्धि वाला व्यक्ति समझ सकता है कि यदि कोई दल यह आरोप लगा रहा है कि ईवीएम मैनेज्ड है, तो फिर एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को मैनेज करने की क्या जरूरत है? दोनों आरोप एक साथ सच नहीं हो सकते. ऐसी बातें कहने वाला व्यक्ति या तो बाल बुद्धि का हो सकता है या दिमागी नक्सल हो सकता है. कांग्रेस बताए कि ये दोनों आरोप एक साथ कैसे लगा सकती है? हकीकत यह है कि कांग्रेस न तब सच बोल रही थी और न आज सच बोल रही है. वह तब भी झूठ बोल रही थी और आज भी झूठ बोल रही है.
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डीकेपी/
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