
New Delhi, 23 अक्टूबर . India और जर्मनी ने औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों एवं भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की मदद से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की है. यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने Friday को दी.
गोयल ने India और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए बर्लिन में उच्चस्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला में हिस्सा लिया. बर्लिन में हुई ये बैठकें भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के जारी प्रयासों का हिस्सा हैं. इसमें विशेष रूप से व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग पर जोर दिया गया.
इन बैठकों में जर्मनी की आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीशे के साथ द्विपक्षीय बैठक, जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (डीजीएपी) में इंडिया सेंटर का उद्घाटन, भारत-जर्मनी बिजनेस राउंडटेबल और ‘बर्लिन ग्लोबल डायलॉग’ में भागीदारी शामिल रही.
गोयल और जर्मनी की संघीय मंत्री रीशे ने संयुक्त रूप से बर्लिन में डीजीएपी के इंडिया सेंटर का उद्घाटन किया. इस केंद्र का उद्देश्य भारत-जर्मनी संबंधों पर नीतिगत शोध और संवाद को बढ़ावा देना है.
दोनों मंत्रियों ने डीजीएपी और जर्मन बिजनेस के एशिया-प्रशांत समिति (एपीए) के सहयोग से आयोजित भारत-जर्मनी बिजनेस राउंडटेबल की सह-अध्यक्षता भी की. इसमें जर्मनी की विभिन्न कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और कारोबारी नेताओं ने हिस्सा लिया.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अपने मुख्य संबोधनों में गोयल ने विकास की गति तेज करने और व्यापार के एक नए युग की शुरुआत करने पर बात की, जबकि रीशे ने मुक्त व्यापार समझौते को औद्योगिक क्षेत्र में वास्तविकता में बदलने पर अपने विचार रखे.
बयान में कहा गया, “इसके बाद हुई चर्चा में प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को ठोस व्यापार और निवेश अवसरों में बदलने पर ध्यान केंद्रित किया गया.”
‘बर्लिन ग्लोबल डायलॉग’ में गोयल ने “नया युग, नए गठबंधन: तीसरा रास्ता?” शीर्षक वाले पैनल चर्चा में भाग लिया. इस चर्चा में जर्मन चांसलर के निवेश मामलों के व्यक्तिगत प्रतिनिधि मार्टिन ब्लेसिंग, सिंगापुर के मानव संसाधन मंत्री और ऊर्जा एवं विज्ञान और प्रौद्योगिकी मामलों के प्रभारी मंत्री डॉ. टैन सी लेंग और मार्सेगाग्लिया स्टील की अध्यक्ष एवं सीईओ एम्मा मार्सेगाग्लिया भी शामिल हुईं.
गोयल ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में विश्वास, एक-दूसरे की आर्थिक क्षमताओं के पूरक होने और मजबूत एवं लचीली आपूर्ति शृंखलाओं के महत्व पर जोर दिया.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री की जर्मनी और नीदरलैंड की इस यात्रा में लगभग 100 भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप का प्रतिनिधिमंडल उनके साथ है.
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एबीएस
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