
मिल्वौकी, 1 अक्टूबर . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने Thursday को कहा कि उन्होंने जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर यूरोपीय संघ (ईयू) के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस शेफचोविच से मुलाकात की और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हुई प्रगति की समीक्षा की.
पीयूष गोयल ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-ईयू एफटीए पर हस्ताक्षर और उसे लागू करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की. इसके अलावा, भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) सुधार और जी20 के साझा प्राथमिकता वाले मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया.
गोयल ने कहा कि India और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए दोनों पक्ष लगातार काम कर रहे हैं और मुक्त व्यापार समझौते को प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
गौरतलब है कि India और यूरोपीय संघ ने इस वर्ष 27 जनवरी 2026 को मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता सफलतापूर्वक पूरी की थी. इस समझौते पर बातचीत की प्रक्रिया वर्ष 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन लंबे समय तक ठहरी रहने के बाद इसे 2022 में फिर से शुरू किया गया था.
समझौते को लागू करने की दिशा में इस महीने एक और महत्वपूर्ण कदम तब उठा, जब यूरोपीय आयोग ने इसे हस्ताक्षर और अंतिम मंजूरी के लिए ईयू परिषद को भेज दिया.
इससे पहले सितंबर में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा था कि लगभग 17 वर्षों की बातचीत के बाद पूरा हुआ भारत-ईयू एफटीए दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
उन्होंने कहा था कि तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय विनिर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) India के औद्योगिक विकास के अगले चरण की आधारशिला बन सकते हैं.
जितिन प्रसाद ने इस बात पर भी जोर दिया था कि India में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों को केवल निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संयुक्त उद्यमों और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से देश की विनिर्माण और तकनीकी क्षमताओं को भी मजबूत करना चाहिए.
उन्होंने कहा था कि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और निर्यात बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. साथ ही एआई के व्यापक उपयोग से उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए.
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डीबीपी
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