
New Delhi, 29 अक्टूबर . केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने Thursday को कहा कि जब भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील की जानकारी जारी की जाएगी, तब देश के लोगों को पता लगेगा कि Government ने किसानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लेकर कोई समझौता नहीं किया है और India एक मजबूत तुलनात्मक लाभ की स्थिति में होगा.
गोयल ने बताया कि व्यापार मूल रूप से केवल पूर्ण आंकड़ों के बारे में नहीं, बल्कि तुलनात्मक लाभ और प्रतिस्पर्धात्मकता के बारे में है.
उन्होंने कहा कि कई विकसित देशों ने अपने टैरिफ ढांचे को इस तरह तैयार किया है कि वे श्रम-प्रधान वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाते हैं, और इन शुल्कों का इस्तेमाल वे बातचीत के एक साधन के रूप में करते हैं.
गोयल ने यह बयान ‘इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट’ (आईएसआईडी) और ‘इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएशन’ (आईडीआरए) द्वारा आयोजित ‘India के औद्योगिक परिवर्तन पर चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए दिया.
India की व्यापार नीति पर गोयल ने कहा कि देश के व्यापार समझौते केवल टैरिफ कम करने, वस्तुओं के उत्पत्ति के नियम तय करने या बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं हैं.
गोयल ने कहा, “ये व्यापक साझेदारियां हैं, जिनमें India की प्रतिस्पर्धी क्षमताओं को ध्यान में रखा गया, निर्यात के अवसरों की पहचान की गई, संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया, और उच्च-तकनीकी उत्पादों, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू), मेमोरी तकनीक, चिकित्सा तकनीक और India के विकास के लिए आवश्यक अन्य वस्तुओं तक पहुंच को आसान बनाया गया.”
उन्होंने कहा कि India की व्यापार वार्ताओं में सेवाएं, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी साझेदारी, जलवायु लक्ष्यों की दिशा में सहयोग और देशों के ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (एनडीसी) जैसे विषय भी शामिल थे.
ये व्यापक समझौते India को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की नींव रख रहे थे. साथ ही, किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया गया, ताकि India की संवेदनशीलताओं और हितों की रक्षा की जा सके.
उन्होंने बताया कि India के व्यापार समझौतों में 38 विकसित और अपेक्षाकृत समृद्ध देश शामिल हैं. इससे दोनों पक्षों के लिए एक-दूसरे के पूरक व्यापार अवसर पैदा हुए हैं. India उन उत्पादों का निर्यात करता है जिनकी उन्हें जरूरत है, और अपने विकास के लिए आवश्यक उत्पादों का आयात करता है.
Government द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों ने कुल 60 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाले बाजारों में India के लिए विशेष अवसर खोले हैं. इसकी तुलना में, 2014 से पहले किए गए समझौतों के दायरे में केवल 10 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाले बाजार आते थे.
उन्होंने कहा कि पहले के समझौते मुख्य रूप से उन देशों के साथ थे जो India के प्रतिस्पर्धी थे, जबकि मौजूदा दृष्टिकोण का उद्देश्य ऐसे आर्थिक संबंध बनाना है जो एक-दूसरे के पूरक हों.
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि India के औद्योगिक बदलाव का आधार गुणवत्ता, बड़े पैमाने पर उत्पादन, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और समावेशिता होनी चाहिए. उन्होंने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए Government, उद्योग जगत और शिक्षा जगत के बीच करीबी सहयोग का आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि India को एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त विनिर्माण राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखना चाहिए. साथ ही, Government, उद्योग जगत, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के समन्वित प्रयासों के जरिए ‘विकसित India 2047’ के लक्ष्य को हासिल करना चाहिए.
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एबीएस
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