भारतीय शेयर बाजार में मुनाफावसूली, सेंसेक्स 876 अंक फिसला

Mumbai , 19 अक्टूबर . कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में Monday को मुनाफावसूली देखने को मिली. दिन के अंत में सेंसेक्स 876.37 अंक या 1.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 73,852.90 और निफ्टी 257.20 अंक या 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,888.95 पर था.

बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली. सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक (1.85 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (1.58 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (1.44 प्रतिशत), निफ्टी आईटी (1.28 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज (1.25 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (1.20 प्रतिशत), निफ्टी कंजप्शन (1.05 प्रतिशत) और निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.94 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ.

सूचकांकों में केवल निफ्टी पीएसयू बैंक 2.46 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ.

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कमजोरी देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 641.80 अंक या 1.09 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 58,487.95 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 194.05 अंक या 1.01 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 18,935.75 पर बंद हुआ.

सेंसेक्स पैक में एसबीआई, अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी और इंडिगो गेनर्स थे. एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, टाइटन, टेक महिंद्रा, एमएंडएम और पावर ग्रिड लूजर्स थे.

जानकारों ने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजारों में बिकवाली की वजह कमजोर वैश्विक संकेत, प्राइवेट बैंकों और आईटी शेयरों में दबाव था. तिमाही नतीजों और मार्जिन ट्रेंड को लेकर चिंताओं के चलते प्राइवेट बैंक दबाव में रहे, जबकि पीएसयू बैंकों ने इस व्यापक कमजोरी के विपरीत बेहतर प्रदर्शन किया. उन्हें मार्जिन और एसेट क्वालिटी के स्थिर बने रहने की उम्मीदों से सहारा मिला.

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका द्वारा रूस से जुड़े प्रमुख प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, जिससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद जगी. हालांकि, भू-Political तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी रहीं. हालांकि, निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया. वहीं, व्यापक बाजार का रुझान भी कमजोर रहा, जो नतीजों से जुड़ी अस्थिरता और अनिश्चित वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है.

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एबीएस