
वॉशिंगटन, 15 अक्टूबर . भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने रूस से डीजल खरीदने को लेकर President डोनाल्ड ट्रंप की योजना पर फिर से हमला बोला है. दूसरी तरफ, रूस के President व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने इस समझौते का बचाव किया है.
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक अहम अमेरिकी कानून की समयसीमा नजदीक आ रही है, जिससे India और चीन जैसे रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर भारी शुल्क लग सकता है.
कृष्णमूर्ति ने Wednesday को ‘एक्स’ पर लिखा, “ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक गैरकानूनी युद्ध शुरू किया, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ गईं. अब वह रूस के साथ डीजल समझौता करके पुतिन को फायदा पहुंचा रहे हैं और साथ ही यूक्रेन पर रूसी तेल सुविधाओं पर हमले रोकने का दबाव डाल रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि पुतिन को अरबों डॉलर मिलेंगे, यूक्रेन को ज्यादा रूसी हमलों का सामना करना पड़ेगा और इसका आर्थिक बोझ अमेरिकी जनता पर पड़ेगा.
बाद में एक और पोस्ट में कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह समझौता पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक मदद देगा, लेकिन इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलेगी. उन्होंने लिखा, “यह गैरकानूनी है, असरदार नहीं है और ट्रंप के ईरान युद्ध को खत्म करने का विकल्प भी नहीं है.”
वहीं, रूस के निवेश और आर्थिक सहयोग मामलों के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने इन आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “दुनिया के सभी व्यावहारिक नेता, जो अपनी जनता की भलाई चाहते हैं, वे रूस सहित किसी भी स्रोत से सस्ता डीजल, गैस और तेल चाहते हैं.”
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने पत्रिका द इकोनॉमिस्ट की आलोचना करते हुए कहा कि उसने यह नहीं बताया कि इस समझौते के बाद डीजल की कीमतों में पांच प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे अमेरिकी किसानों, उपभोक्ताओं और ऊर्जा बाजारों को फायदा हुआ है.
हालांकि, दिमित्रिएव ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने यह आंकड़ा कैसे निकाला या कीमतों में यह गिरावट कितने समय के दौरान हुई. इस मुद्दे पर अमेरिकी संसद में भी विरोध बढ़ता जा रहा है.
कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा कि वह अपने 12 साथियों के साथ मिलकर ट्रंप से इस ‘विनाशकारी रूसी डीजल समझौते’ को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की सुरक्षा के हितों और पुतिन के खिलाफ लड़ रहे बहादुर यूक्रेनियों, दोनों के साथ विश्वासघात है.
दक्षिण कैरोलिना से प्रतिनिधि जेम्स क्लाइबर्न ने इस फैसले को ‘गलती’ बताया.
उन्होंने कहा, “रूसी डीजल पर प्रतिबंधों में ढील देने का ट्रंप का फैसला अमेरिकी ईंधन कीमतों पर बहुत कम असर डालेगा, लेकिन इससे यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को आर्थिक मदद जरूर मिलेगी.”
एरिजोना से प्रतिनिधि ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि यह योजना संभवतः गैरकानूनी है और कीमतें कम करने में भी नाकाम रहेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अरबों डॉलर रूस को मिलेंगे.
कैलिफोर्निया से प्रतिनिधि माइक लेविन ने इसे रूस की युद्ध मशीन के लिए लाइफलाइन बताया. उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस समझौते के जरिए करीब चार अरब डॉलर अमेरिकी धन रूस की अर्थव्यवस्था में जा सकता है.
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएएसी) ने Friday को जनरल लाइसेंस 135 जारी किया था. इसके तहत अप्रैल 2027 तक रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ लेन-देन की अनुमति दी गई है.
यह पूरा विवाद ऐसे समय में हो रहा है, जब ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ के तहत तय समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली है.
कानून की धारा 113 के अनुसार, President उन देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकते हैं, जो रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं और तय समयसीमा के बाद भी नई खरीद जारी रखते हैं. हालांकि, President चाहें तो यह प्रमाणित करके कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, इन शुल्कों से छूट भी दे सकते हैं.
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एवाई/एबीएम
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