भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत, वैश्विक अनिश्चितता का घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर दिखेगा असर : आरबीआई

New Delhi, 21 अक्टूबर . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने Wednesday को कहा कि वैश्विक अनिश्चितता का घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर कुछ असर जारी रहेगा. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है. हालांकि, निकट भविष्य में इनका रुख कैसा रहेगा, यह अभी अनिश्चित है.

5 से 7 अक्टूबर तक हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का विवरण जारी करते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा कि आपूर्ति के स्रोतों में सक्रिय रूप से विविधता लाने से प्रतिकूल प्रभाव को सीमित किया जा रहा है.

एमपीसी की बैठक के विवरण के अनुसार, “दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और अल नीनो की मजबूत परिस्थितियों से कृषि क्षेत्र की संभावनाओं और ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं. हालांकि, खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और Government की सक्रिय नीतिगत पहल इन प्रभावों को कम करने में मदद करेंगी.”

इसके अलावा, सेवा क्षेत्र में जारी तेजी और रोजगार की स्थिति व्यापक रूप से स्थिर रहने से शहरी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. क्षमता का मजबूत उपयोग, कर्ज का बेहतर प्रवाह और बुनियादी ढांचे पर Government का जोर निवेश गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करेंगे.

आरबीआई ने कहा कि जहां सेवा क्षेत्र का निर्यात मजबूत बने रहने की उम्मीद है, वहीं द्विपक्षीय व्यापार समझौतों से वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा मिलना चाहिए.

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है.

उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूरे साल की आर्थिक वृद्धि का अनुमान अब बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है, जो अगस्त में लगाए गए 6.7 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है. हालांकि, महंगाई का दबाव बढ़ रहा है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई के तीसरी तिमाही में सहनशीलता की ऊपरी सीमा तक पहुंचने और अगली दो तिमाहियों में 5 प्रतिशत से काफी ऊपर बने रहने का अनुमान है.”

आरबीआई के अनुसार, मांग पक्ष से महंगाई का दबाव होने के सीमित संकेत हैं. हालांकि, मुद्रा और कर्ज के कुल आंकड़ों में मजबूत वृद्धि को देखते हुए जोखिम बने हुए हैं.

इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए एमपीसी ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत करने का फैसला किया.

एमपीसी ने नीतिगत रुख को बदलकर संतुलित तरीके से मौद्रिक सख्ती करने का भी निर्णय लिया.

इसका संकेत है कि मौजूदा परिस्थितियों में निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है. आगे नीतिगत कार्रवाई के तहत या तो ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं या उन्हें स्थिर रखा जा सकता है. यह फैसला आर्थिक परिस्थितियों और भविष्य के अनुमानों पर निर्भर करेगा.

आरबीआई ने एमपीसी की बैठक के विवरण में कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र कितने समय तक चलेगा और कितनी बढ़ोतरी होगी, यह वास्तव में आर्थिक वृद्धि और महंगाई की स्थिति तथा उनके भविष्य के अनुमानों पर निर्भर करेगा.

इसमें खास तौर पर अंतर्निहित महंगाई, कीमतों में बढ़ोतरी का व्यापक होना, आपूर्ति संबंधी झटकों के दूसरे दौर के प्रभाव और मांग में बदलाव के असर को ध्यान में रखा जाएगा.

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एबीएस