
वाशिंगटन, 24 अक्टूबर . टेक्सास में रहने वाले 21 वर्षीय भारतीय मूल के छात्र पत्रकार वसंत भट्ट ने कहा कि उन्होंने भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत और भेदभाव के विरोध में एक डेमोक्रेट उम्मीदवार को वोट दिया था. इसके बाद कंजर्वेटिव उच्च शिक्षा से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म ‘कैंपस रिफॉर्म’ ने उनकी संवाददाता की भूमिका खत्म कर दी है. यह मामला अब अमेरिकी दक्षिणपंथी खेमे में भारतीय-अमेरिकियों के प्रति बढ़ती शत्रुता पर छिड़ी बहस का एक अहम मुद्दा बन गया है.
यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन में राजनीति विज्ञान के छात्र वसंत भट्ट ने Friday को social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बारे में जानकारी दी.
उन्होंने लिखा, “मैंने अपने विवेक के अनुसार मतदान करने के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किया, भारतीयों के खिलाफ हो रही नफरत के खिलाफ आवाज उठाई और रिपब्लिकन पार्टी की लाइन पर चलने से इंकार किया. अब कैंपस रिफॉर्म के संवाददाता कार्यक्रम में मेरी भागीदारी समाप्त कर दी गई है.”
भट्ट ने कहा, “किसी कार्यक्रम में अपनी जगह खो देने से मैं अपने विचार नहीं बदलूंगा और न ही अपने समुदाय का साथ छोड़ूंगा.”
‘कैंपस रिफॉर्म’ ने अभी तक भट्ट के दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है. हालांकि, वेबसाइट पर मौजूद उनका प्रोफाइल, जिसमें उन्हें ‘सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट’ बताया गया था, अब लेखकों की सूची में दिखाई नहीं देता.
इस महीने की शुरुआत में भट्ट उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने कहा था कि टेक्सास की अमेरिकी सीनेट चुनावी दौड़ में उन्होंने रिपब्लिकन केन पैक्सटन की बजाय डेमोक्रेट जेम्स टालारिको को वोट दिया. भट्ट का कहना था कि भारतीय-अमेरिकियों की पहचान पर हो रहे हमलों और बढ़ती विदेशियों-विरोधी सोच से वह बेहद परेशान थे.
कैंपस रिफॉर्म पर प्रकाशित उनकी जीवनी के अनुसार, उन्होंने पहले सीनेटर टेड क्रूज के पुनर्निर्वाचन अभियान में इंटर्नशिप की थी. साथ ही उन्होंने टेक्सास यूथ समिट के साथ भी काम किया था, जिसे राज्य के सबसे बड़े युवा रूढ़िवादी सम्मेलनों में से एक माना जाता है.
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुहाग शुक्ला ने भी ‘एक्स’ पर एक व्यक्तिगत पोस्ट में भट्ट के खिलाफ हो रहे हमलों की आलोचना की. उन्होंने इसे इलिनोइस के ऑरोरा स्थित एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश से पहले बने माहौल से जोड़ा.
कैंपस रिफॉर्म, वर्जीनिया स्थित रूढ़िवादी गैर-लाभकारी संस्था लीडरशिप इंस्टीट्यूट की एक परियोजना है. यह संस्था युवा कार्यकर्ताओं और Political कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने का काम करती है.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राजनीति में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी को लेकर बहस तेज है. तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले भारतीय मूल के उम्मीदवारों पर हमले, social media पर भारतीय एच-1बी वीजा धारकों को निशाना बनाने वाली टिप्पणियां और ऑनलाइन दुर्व्यवहार चर्चा का विषय बने हुए हैं.
भारतीय मूल के कई अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इस तरह की भाषा अब सिर्फ ऑनलाइन बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा की घटनाओं को भी बढ़ावा दे रही है. उन्होंने उदाहरण के तौर पर ऑरोरा मंदिर से जुड़े कथित षड्यंत्र का जिक्र किया है.
टेक्सास में अमेरिका की सबसे बड़ी भारतीय-अमेरिकी आबादियों में से एक रहती है. इनमें से बड़ी संख्या ह्यूस्टन और डैलस-फोर्ट वर्थ क्षेत्र में बसती है.
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एवाई/पीएम
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