भाजपा ने सभी वर्गों को दिया सम्मान, 2027 में दो-तिहाई बहुमत से बनेगी सरकार: ओपी राजभर

Lucknow, 6 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने Chief Minister योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा के 8 राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर पार्टी की सामाजिक भागीदारी की सराहना की. उन्होंने Samajwadi Party प्रमुख अखिलेश यादव की राज्यसभा रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बड़े-बड़े दावे चुनावी मैदान में फ्लॉप साबित हुए हैं. वहीं, दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के विरोध को लेकर भी राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधा.

राजभर ने से बातचीत में कहा कि भाजपा ने राज्यसभा के लिए घोषित आठ उम्मीदवारों की सूची में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया है. बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में जिन वर्गों की बात की थी, भाजपा ने आठ सीटों में सभी वर्गों को समायोजित करने का प्रयास किया है. पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अनुसूचित वर्ग समेत अलग-अलग सामाजिक समूहों से लोगों को राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है. उन्होंने कहा कि भाजपा में ऐसे लोगों को भी अवसर मिलता है, जिनके बारे में पहले यह कल्पना करना मुश्किल था कि वे देश की सर्वोच्च विधायी संस्थाओं में पहुंचेंगे. राजभर ने पाल समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे सामाजिक वर्ग के व्यक्ति को भी राज्यसभा जाने का अवसर मिला है. भाजपा की यही सामाजिक प्रतिनिधित्व की नीति उसे अन्य दलों से अलग करती है.

अखिलेश यादव के उस दावे पर कि Samajwadi Party का तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार ऐसा होगा जिससे भाजपा के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी, राजभर ने तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के दावे आज फ्लॉप हो गए. Samajwadi Party में परिवार और धन को प्राथमिकता दी गई. परिवार के लिए रामगोपाल यादव और धन के लिए धनीराम को उम्मीदवार बनाया गया. उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव जिस बड़े Political मुकाबले की बात कर रहे थे, उसके बजाय भाजपा के उम्मीदवारों के सामने प्रभावी चुनौती पेश नहीं की जा सकी.

राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि Samajwadi Party ने भाजपा के इशारे पर काम किया है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को भाजपा से सीखना चाहिए कि पार्टी किस तरह अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लोगों को Political अवसर देती है. राजभर ने नाई, प्रजापति, पाल, कुम्हार, लोहार और मुस्लिम समाज का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास करती है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को लेकर लगातार बड़ा दावा कर रहे थे, लेकिन अंत में उनका दावा जमीन पर दिखाई नहीं दिया. राजभर ने कहा कि Samajwadi Party के कार्यकर्ता केवल दरी बिछाते रह जाएंगे और नारे लगाते रहेंगे, जबकि उन्हें Political रूप से कुछ हासिल नहीं होगा.

अखिलेश यादव की 403 विधानसभा सीटों पर नजर होने के बयान पर भी राजभर ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव 403 सीटों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की Government बनेगी. उत्तर प्रदेश में भाजपा दो-तिहाई से भी अधिक सीटों के साथ Government बनाएगी. उन्होंने इसे लेकर भी अखिलेश यादव पर तंज कसा और कहा कि भाजपा की Government बनवाने की जिम्मेदारी भी अखिलेश यादव की ही होगी.

दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सांसदों द्वारा एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किए जा रहे आंदोलन पर राजभर ने इसे गलत बताया. उन्होंने विपक्ष से चुनाव परिणामों के आंकड़ों पर विचार करने की बात कही. राजभर ने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस की पूरे देश में Government थी और उस समय देश की व्यवस्था उसके नियंत्रण में थी. उन्होंने विपक्ष के चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होती, तो 2019 में भाजपा को 303 सीटें मिलने के बाद 2024 में उसकी सीटें घटकर 240 पर नहीं आतीं.

उन्होंने कहा कि विपक्ष को आंकड़ों पर भी ध्यान देना चाहिए. अगर चुनाव में बेईमानी हुई होती तो भाजपा की सीटें बढ़नी चाहिए थीं, लेकिन उसकी संख्या कम हुई. उन्होंने उत्तर प्रदेश के नतीजों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अगर चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी होती तो Samajwadi Party 37 और कांग्रेस छह सीटें कैसे जीतती? राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद कभी चुनाव आयोग और कभी ईवीएम को जिम्मेदार ठहराता है. चुनाव के बाद हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर सवाल उठाता रहता है.

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष अब सवाल क्यों उठा रहा है और इससे पहले की व्यवस्थाओं के दौरान इन मुद्दों पर उसकी आवाज क्यों नहीं उठी.

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