भाजपा ने पूछा-क्या रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का जरिया था छात्रों का प्रदर्शन

Mumbai , 12 अक्टूबर . भाजपा ने Monday को एमपीएससी छात्रों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए. पार्टी ने पूछा कि क्या यह आंदोलन सचमुच छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए था या फिर एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की Political महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का जरिया था.

भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने एमपीएससी की तैयारी कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों और Chief Minister देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठक आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने छात्रों की चिंताओं को संवेदनशीलता से सुनने और समाधान खोजने के लिए चौथी बार छात्र प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने पर Chief Minister का आभार व्यक्त किया.

हालांकि, उन्होंने रोहित पवार को चुनौती दी कि वे स्पष्ट करें कि छात्रों को इन विरोध प्रदर्शनों से आखिरकार क्या हासिल हुआ और किसे Political फायदा हुआ.

पचपुते ने कहा कि हालांकि Chief Minister फडणवीस ने 30 सितंबर को छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली थीं लेकिन एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग सीधे तौर पर राज्य Government के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती थी. अगर Chief Minister के पास अध्यक्ष को हटाने का सीधा अधिकार होता, तो वे बहुत पहले ही उचित कार्रवाई कर चुके होते. संवैधानिक सीमाएं होने के बावजूद, रोहित पवार ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने पर जोर दिया.

उन्होंने मुख्य मांगें पूरी होने के बाद भी आंदोलन जारी रखने के औचित्य पर सवाल उठाया और कहा कि आखिरकार आंदोलन में शामिल असली छात्रों और Political कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया.

कानूनी और संस्थागत पहलुओं का जिक्र करते हुए पचपुते ने समझाया कि राज्य Governmentों के पास एमपीएससी जैसे संवैधानिक निकाय के अध्यक्ष को हटाने की सीधी शक्ति नहीं होती है, क्योंकि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत एक विशिष्ट प्रक्रिया की आवश्यकता होती है.

उन्होंने कहा कि Government ने संवैधानिक तरीका अपनाया. न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही अध्यक्ष छुट्टी पर चले गए. अगर 30 सितंबर को ही जांच प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया गया होता, तो बाद के टकराव से बचा जा सकता था और इतने बड़े हंगामे की जरूरत ही नहीं पड़ती.

पचपुते ने कुछ Political हस्तियों पर विरोध प्रदर्शन के मंच पर विभिन्न राजनेताओं, प्रभावशाली लोगों और कलाकारों को बुलाकर इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि ध्यान छात्रों की समस्याओं को हल करने से हटकर व्यक्तिगत प्रचार और Political लाभ हासिल करने पर केंद्रित हो गया.

गलत प्राथमिकताओं के बारे में अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए पचपुते ने छात्रों को एक चेतावनीपूर्ण उदाहरण दिया और उन्हें सलाह दी कि वे अपने करियर और पढ़ाई की कीमत पर Political एजेंडे से गुमराह न हों. उन्होंने कहा कि छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अधिकारी बनने के लिए तैयारी और संघर्ष करते हैं, न कि Political नेताओं के लिए सीढ़ी बनने के लिए.

उन्होंने पूछा कि रोहित पवार को अब साफ-साफ जवाब देना चाहिए कि इस विरोध-प्रदर्शन से छात्रों को असल में क्या मिला और इसका Political फायदा किसे हुआ.

पचपुते की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब पुणे में एमपीएससी के लिए तैयारी कर रहे छात्रों ने अपना 11 दिन का विरोध-प्रदर्शन खत्म कर दिया. उन्होंने पेपर लीक के मामले में एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग की थी.

राज्य Government ने एमपीएससी के कामकाज में संरचनात्मक कमियों की जांच करने और दो महीने के भीतर सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमिटी बनाने की घोषणा की थी. इसके बाद, Monday को सुबह 1.24 बजे एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने एक्स पर घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर जा रहे हैं.

रोहित पवार ने कहा कि भले ही इसमें देरी हुई लेकिन Government ने छात्रों की मांगें मान ली हैं. हमारी मुख्य मांग इस्तीफे की थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हमने आंदोलन को रोकने का फैसला किया. यह जीत छात्रों की एकता की जीत है.

रोहित पवार ने माना कि Government ने तुरंत इस्तीफा तो नहीं लिया, बल्कि चेयरमैन विवेक भीमन्वार को छुट्टी पर भेज दिया. छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए वे काफी हद तक पीछे हटे. छात्र एक कदम पीछे हटे, लेकिन Government दस कदम पीछे हटी.

उन्होंने पुणे में तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा दिखाई गई अभूतपूर्व एकजुटता की तारीफ की, साथ ही प्रमोद पाटिल जैसे नेताओं और समर्थकों की भी सराहना की, जिन्होंने आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि प्रशासन को सुधार लागू करने के लिए एक सख्त समय-सीमा दी गई है और चेतावनी दी कि जवाबदेही प्राथमिकता बनी रहेगी.

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डीकेएम/पीएम