
New Delhi, 8 सितंबर . दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर Prime Minister Narendra Modi और रूसी President व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात तय है. क्रेमलिन ने Prime Minister Narendra Modi और रूसी President व्लादिमीर पुतिन की Friday को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि करते हुए India को रूस का “रणनीतिक साझेदार” बताया है.
रूसी President के दिल्ली पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और President पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने Tuesday को मीडिया से वर्चुअल बातचीत की. उनके बयानों में भारत-रूस रिश्तों की गर्माहट के साथ-साथ बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक भी दिखाई दी.
पेस्कोव ने कहा, “दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क बहुत अहम होंगे, खासकर Prime Minister मोदी के साथ बैठक. जैसा कि आप जानते हैं, India और रूस के नेताओं के बीच बहुत करीबी संबंध हैं. उनके संबंध बहुत व्यावहारिक हैं और वे एक-दूसरे के साथ इतने ईमानदार हैं कि वैश्विक एजेंडे और हमारे आपसी संबंधों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं.”
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने, पश्चिमी प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े सवालों से जूझ रही है.
ब्रिक्स की अहमियत पर पेस्कोव ने प्रकाश डालते हुए कहा,” मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है. हमारे पास कोई चार्टर, नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है. बल्कि, यह उन देशों का एक क्लब है जो इस बात पर एक जैसी सोच रखते हैं कि दुनिया में काम कैसे होने चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कैसे किया जाना चाहिए.”
उन्होंने ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र करते हुए कहा, “रूस ब्रिक्स सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों – राजनीति और सुरक्षा; अर्थव्यवस्था और वित्त; और सांस्कृतिक व मानवीय संपर्क – के और विकास में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. बेशक, हमारी अपनी कई पहल हैं जिन्हें हम इस समूह के भीतर बढ़ावा दे रहे हैं. हम ब्रिक्स के भीतर सहयोग के अलग-अलग तरीकों में ज्यादा से ज्यादा देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन करते हैं.”
पार्टनर कंट्री के कॉन्सेप्ट की प्रशंसा करते हुए पेस्कोव बोले, ” 2024 में, पार्टनर देशों की एक नई श्रेणी – ‘ब्रिक्स पार्टनर कंट्री’ श्रेणी – बनाई गई थी, और अब यह बहुत अच्छी तरह से विकसित हो रही है. बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर का दर्जा दिया गया है. इन देशों के प्रतिनिधियों को धीरे-धीरे अलग-अलग वर्किंग ग्रुप और फॉर्मेट में शामिल किया जा रहा है, और हम इसे एक बहुत ही सकारात्मक विकास मानते हैं.”
उन्होंने बताया कि रियो डी जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक्सपर्ट लेवल पर बातचीत शुरू करने की पहल की. बोले, “हम इस पहल को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, और ब्रिक्स के भीतर कई देशों ने इसका समर्थन किया.”
पेस्कोव ने बताया कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच अब करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है. यह बयान ऐसे समय आया है जब डॉलर के प्रभुत्व और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा तेज है.
India के रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को “अवैध” करार दिया.
पीएम मोदी-President पुतिन बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशें भी अहम मुद्दा हो सकती हैं. India ने शुरुआत से ही युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है.
India की इसी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा, “हम भारतीय प्रयासों का स्वागत करते हैं.”
पेस्कोव ने ब्रिक्स को सिर्फ आर्थिक समूह के रूप में देखने से आगे बढ़ते हुए इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया.
उन्होंने कहा कि India ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता में काफी निवेश किया है और संगठन की विचारधारा बहुध्रुवीय दुनिया की विचारधारा है. उनके अनुसार एकध्रुवीय दुनिया ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है.
उनके मुताबिक, दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन केवल सदस्य देशों की बैठक नहीं है. इसके पीछे दुनिया की उस नई व्यवस्था की बहस भी है जिसमें रूस, भारत, चीन और दूसरे उभरते देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभाव की मांग कर रहे हैं.
इसके साथ ही पेस्कोव ने भारत-रूस संबंधों को काफी महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “कहानी केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं है.” पेस्कोव ने India में नए परमाणु संयंत्र के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई. उन्होंने रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का भी स्वागत किया.
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केआर/
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